देवीपाटन मंडल की चार संसदीय सीटों में तीन पर सियासी संग्राम की धूम है। बहराइच में तो नामांकन का दौर चल रहा है। जल्द ही चारों सीटों पर भी इसकी गूंज सुनाई पड़ेगी। तीन चरणों में चारों सीटों का चुनाव तय है। भाजपा मंडल की 2019 का इतिहास दोहराने के साथ ही हारी श्रावस्ती सीट पर कब्जा करने के लिए एड़ी से चोटी का जोर लगाए है, वहीं सपा भी समीकरणों के सहारे चारों सीटों पर नजर गड़ाए है। बसपा अभी दोनों दलों के दांव पर चाल की तैयारी में लगी है। उसने फिलहाल खामोशी साध रखी है।
2019 के आम चुनाव में मंडल की चारों सीटों पर भाजपा और कांग्रेस ने ताल ठोंकी थी। सपा व बसपा ने दो-दो सीटों पर प्रत्याशी उतारा था। चुनावी समर में भाजपा ने बड़े अंतर से गोंडा, कैसरगंज व बहराइच से जीत हासिल की थी। श्रावस्ती में सपा व बसपा गठबंधन ने जीत हासिल की। बाकी कांग्रेस का प्रदर्शन सीमित ही रहा। पार्टी किसी भी सीट पर छह फीसदी मत भी हासिल नहीं कर सकी। भाजपा ने इस बार चार में तीन सीटों पर प्रत्याशी तय किए हैं, जिसमें श्रावस्ती व बहराइच से नये चेहरों को मौका मिला है।
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- गोंडा संसदीय सीट में बदलाव नहीं किया है। कैसरगंज पर अभी मंथन ही चल रहा है। सपा ने गोंडा, श्रावस्ती व बहराइच से नया प्रत्याशी उतारा है। श्रावस्ती व गोंडा में सपा ने पिछड़े वर्ग का दांव चलकर मतों के ध्रुवीकरण का पासा फेंका है। फिलहाल बसपा से प्रत्याशी न होने से अभी दोनों दल आमने- सामने हैं।
गोंडा-श्रावस्ती में समीकरण की सियासत
गोंडा व श्रावस्ती में जातियों का समीकरण खासा मायने रखता है। भाजपा ने साकेत मिश्र को मैदान में उतारा है। उनका श्रावस्ती जनपद से गहरा जुड़ाव है और बीते पांच सालों में बतौर एमएलसी उन्होंने श्रावस्ती में बड़े काम किए। इससे इस बार भाजपा ने यहां हिसाब बराबर करने का खाका खींचा है।
सपा ने मौजूदा बसपा सांसद राम शिरोमणि वर्मा को पार्टी में शामिल कराकर उनके बीते चुनाव के प्रदर्शन को भुनाने की रणनीति बनाई। इससे मंडल की तीनों सीटों में श्रावस्ती का मुकाबला रोचक है। गोंडा में भाजपा कीर्तिवर्धन सिंह को तीसरी बार मैदान में उतारा है तो सपा ने श्रेया वर्मा के माध्यम से कड़ी चुनौती दी है। इन दोनों सीटों पर समीकरण मायने रखता है।
बहराइच में जाति की नहीं धाक की धमक
बहराइच सुरक्षित सीट में जातीय समीकरण से ज्यादा दावेदारों की धाक मायने रख रही है। भाजपा ने मौजूदा सांसद अक्षयबर लाल गौड़ के बेटे डा. आनंद गौड़ पर भरोसा जताया है। पार्टी को परंपरागत मतों के साथ ही अनुसूचित जाति व पिछड़े मतों पर भरोसा है, वहीं सपा ने बसपा के कद्दावर नेता पूर्व विधायक रमेश गौतम को मौका दिया है। इससे पार्टी के परंपरागत मतों के साथ ही अनुसूचित मतों के मिलने की आस है।