भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी व स्मृति ईरानी।
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मंडल की जिन दो सीटों पर देश के नामचीन नेता ताल ठोक रहे थे उस अमेठी और सुल्तानपुर में मतदाताओं ने वोटिंग में खास रुचि नहीं दिखाई। नतीजा यह रहा कि अमेठी मंडल में जहां सबसे फिसड्डी रहा वहीं सुल्तानपुर भी चौथे नंबर पर रहा। कम मतदान के पीछे जहां राजनीतिक दलों की रणनीतिक कमजोरी मानी जा रही है तो वहीं प्रशासन की ओर से चलाए कार्यक्रम भी विफल नजर आए।
अयोध्या मंडल में पूर्ण रूप से कुल पांच संसदीय सीटें हैं। फैजाबाद, बाराबंकी, अयोध्या, अमेठी और सुल्तानपुर। इसमें से अमेठी सीट पूरे देश में चर्चा का विषय रही। क्योंकि यहां से कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा मैदान में थे तो उनकी टक्कर केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी से थी। इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही अपनी पुरजोर ताकत लगाई थी। किंतु मतदाताओं को यह मुकाबला शायद रास नहीं आया। इसलिए वोट देने के लिए पूरे मंडल में सबसे कम मतदाता निकले और मतदान का प्रतिशत केवल 54.34 फीसदी ही रह गया।
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मंडल की दूसरी सबसे चर्चित सीट सुल्तानपुर थी, जहां देश की सबसे अनुभवी मौजूदा लोकसभा सदस्य मेनका गांधी चुनाव मैदान में उतरी थीं। भाजपा ने जिस तरह से उनके बेटे वरुण गांधी का टिकट काटा था, उसे देखते हुए भी इस सीट पर पूरे देश की नजरें टिकी थीं। उनके मुकाबले भले ही कोई भारी भरकम चेहरा मैदान में नहीं था, किंतु माना जा रहा था कि मेनका के लिए यहां भारी मतदान हो सकता है। किंतु इस सीट पर पर भी मतदाताओं ने अरुचि दिखाई और कुल 55.5 फीसदी मतदाताओं ने ही यहां वोट डाले। इस तरह यह सीट मतदान में अमेठी से भले ही आगे रही, लेकिन फैजाबाद, बाराबंकी और अंबेडकरनगर के मुकाबले बेहद पीछे रह गई।
चुनाव आयोग के प्रयास भी रह गए धरे, गर्मी का बहाना
अमेठी और सुल्तानपुर में जिस तरह से मतदान कम हुआ है। इसे चुनाव आयोग की ओर से चलाए गए जागरूकता कार्यक्रमों की भी विफलता माना जा रहा है। आयोग की ओर से कार्यक्रम तो बहुतेरे कराए गए, लेकिन वे जनता को जोड़ने में सफल नहीं हो पाए। सुल्तानपुर के उप जिला निर्वाचन अधिकारी गौरव शुक्ला कहते हैं कि गर्मी ज्यादा होने का असर भी पड़ा है। स्वीप के तहत जनता को जोड़ने के लिए बहुत प्रयास किए गए थे।
मंडल के जिले का मतदान प्रतिशत
| जिला |
मतदान प्रतिशत
|
| बाराबंकी |
67.20 |
| अंबेडकरनगर |
61.58 |
| अयोध्या |
59.14 |
| सुल्तानपुर |
55.63 |
| अमेठी |
54.34 |