हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लोकायुक्त को आरटीआई से बाहर रखने के प्रदेश सरकार के आदेश को खारिज कर दिया है। जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस वीरेंद्र कुमार की खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि लोकायुक्त की संस्था बनाने का मूल मकसद एक ऐसे स्वतंत्र इकाई का गठन करना था, जो लोकसेवकों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायतों के संबंध में जांच करे।
लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त कार्रवाई के लिए प्रदेश सरकार को अपनी रिपोर्ट देते हैं। लोकायुक्त संस्था न तो सुरक्षा इकाई है और न ही अभिसूचना इकाई। ऐसे में यह आरटीआई एक्ट की धारा 24(4) के दायरे में नहीं आती।
हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार की अधिसूचना को भी अवैध ठहराते हुए इसे खारिज कर दिया।
प्रदेश सरकार ने आरटीआई एक्ट की धारा 24(4) में दी गई शक्तियों का प्रयोग कर 22 अगस्त 2012 की अधिसूचना के जरिये लोकायुक्त कार्यालय को आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया था। समाजसेवी नूतन ठाकुर ने याचिका दायर कर इस आदेश को चुनौती दी थी।