अंतिम चरण की कई सीटों पर मुस्लिम पिछड़ी जातियों की भी अच्छी-खासी तादाद है। अनसूचित जाति की आबादी तो है ही। पिछड़ों में कुर्मी, कुशवाहा या मौर्य, यादव, निषाद, केवट, राजभर, चौहान (नोनिया) जातियां मुख्य रूप से अलग-अलग सीट पर प्रभावी संख्या में हैं। गोरखपुर में सर्वाधिक पिछड़ी जातियों की आबादी है। वहां इनकी संख्या 50 प्रतिशत से अधिक है।
वहां यादव, कुर्मी, सैंथवार, राजभर, कहार, केवट, कश्यप व मल्लाह तथा कोयरी जैसी जातियां समीकरणों में उलटफेर करने की स्थिति में हैं। महराजगंज में यादव, कुर्मी, सैंथवार, केवट, राजभर व कोयरी जातियां प्रभावी हैं तो देवरिया में कुर्मी, यादव, बढ़ई, लोहार, बारी, कहार, गुड़िया, हलवाई, लोनिया कलवार व तेली ठीक संख्या में हैं।
घोसी में यादव, राजभर, केवट, मल्लाह, कहार व गुड़िया व कोयरी जैसी जातियां प्रभावी हैं। मिर्जापुर व सोनभद्र में कुर्मी, कहार, केवट, मल्लाह, गड़रिया, कुम्हार व कोयरी जातियां अच्छी संख्या में हैं। बलिया में अहीर, बढ़ई, लोहार, राजभर, हलवाई, कलवार, कोयरी, कुम्हार, तेली, कहार, गुड़िया समीकरण बनाने व बिगाड़ने की स्थिति में हैं। गाजीपुर में यादव, राजभर, कोयरी, केवट, मल्लाह, लोनिया तो बनारस में यादव, कुर्मी, बढ़ई, लोहार, बारी, गड़रिया, राजभर, केवट, मल्लाह, कहार, गुड़िया व नाई वोट का समीकरण दलों की नैया पार लगाने की स्थिति में है।
सपा-बसपा गठबंधन की रणनीति पिछड़ों के साथ अनुसूचित जाति और मुस्लिम को साथ लेकर भाजपा से सीटें हथियाने की है तो भाजपा पिछड़ों के साथ अगड़ों और अनुसूचित जाति के वोटों को हासिल कर अपनी जीत का रास्ता आसान बनाना चाहती है।
सपा-बसपा गठबंधन ने दो कुशवाहा व मौर्य, दो निषाद, एक नोनिया, एक यादव को उम्मीदवार बनाने के साथ अफजाल अंसारी के रूप में मुसलमान चेहरा देकर न सिर्फ मुस्लिम समीकरण साधने की कोशिश की है बल्कि इन सीटों पर बड़ी संख्या में मौजूद जुलाहा, धुनिया, मुसलमान हलवाई व तेली बिरादरी को भी अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिश की है।
कांग्रेस ने भी दो कुशवाहा और एक नोनिया को टिकट देकर इन सीटों पर अपनी घुसपैठ बनाने का प्रयास किया है। भाजपा ने दो कुर्मी, एक राजभर, एक कुशवाहा के साथ मोदी के रूप में तेली को टिकट देकर इस इलाके के पिछड़े समीकरणों को साधने का प्रयास किया है।
भाजपा ने चार ब्राह्मणों, एक ठाकुर और एक भूमिहार के साथ 2014 में इस इलाके से मिली ताकत को न सिर्फ जस की तस रखने बल्कि इसमें बढ़ोतरी का भी खाका खींचा है।