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सियासी कुश्ती की बादशाहत के संघर्ष का गवाह बना ‘तुलसी का गुरुस्थल’  

Sun, 05 May 2019 04:23 AM IST
देव कश्यप राजेंद्र सिंह, अमर उजाला, कैसरगंज
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बृजभूषण शरण सिंह (भाजपा), विनय कुमार पांडेय (कांग्रेस) और चंद्रदेव राम यादव (गठबंधन) - फोटो : अमर उजाला
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तरबगंज से करनैलगंज के बीच मुख्य मार्ग पर परसपुर से सात किमी दक्षिण में राजापुर गांव में गोस्वामी तुलसीदास का मंदिर है। विवाद के बावजूद स्थानीय लोग इसे तुलसीदास की जन्मस्थली मानते हैं। इससे तीन-चार किमी दूर सूकरखेत (पसका) में उनके गुरु नरहरदास की स्थली है। इन दोनों ऐतिहासिक, सांस्कृतिक स्थलों की तरह कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र भी विकास व पहचान की दौड़ में पिछड़ा है।

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गोंडा की तीन व बहराइच की दो विधानसभा सीटों को मिलाकर बने कैसरगंज संसदीय क्षेत्र से भाजपा के बृजभूषण शरण सिंह हैट्रिक बनाने मैदान में उतरे हैं। भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण कुश्ती के साथ ही सियासी दांव-पेच में माहिर हैं। उन्हें रोकने के लिए गठबंधन ने बसपा के पूर्व मंत्री चंद्रदेव राम यादव व कांग्रेस ने पूर्व सांसद विनय कुमार पांडेय को उतारा है। बृजभूषण इस सीट से 2009 में सपा तथा 2014 में भाजपा से चुने गए थे। यहां उनका तीसरा चुनाव है। हालांकि, वह गोंडा व बलरामपुर से भी तीन बार सांसद रह चुके हैं। उनकी स्थानीय राजनीति में मजबूत पकड़ मानी जाती हैं। उनकी पत्नी केतकी सिंह गोंडा जिला पंचायत अध्यक्ष और बेटा प्रतीक गोंडा सदर से विधायक है।

बृजभूषण भारतीय कुश्ती संघ अध्यक्ष हैं। बसपा के चंद्रदेव राम यादव मुबारकपुर (आजमगढ़) के पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री हैं। कांग्रेस ने श्रावस्ती से दो बार विधायक, मंत्री व पूर्व सांसद रहे विनय कुमार पांडेय उर्फ विन्नू पांडेय को टिकट दिया है। ब्राह्मण बाहुल्य सीट होने के बावजूद कैसरगंज से 1991 में भाजपा के लक्ष्मीनारायण मणि त्रिपाठी के बाद से ब्राह्मण नहीं जीता। 1996 से 2009 तक बेनी प्रसाद वर्मा चार बार सांसद रहे। 2009 व 2014 में बृजभूषण जीते। 
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-भाजपा को चुनौती दे रहे बसपा के चंद्रदेव और कांग्रेस के विनय पांडेय

-गोंडा व बहराइच जिलों में पड़ने  वाली इस सीट पर बाढ़ और बेरोजगारी मुख्य समस्या
 

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किसके क्या समीकरण


-बृजभूषण पर क्षेत्र की अनदेखी का आरोप। हालांकि लोग वोट उन्हें देने की बात कर रहे हैं ताकि मोदी सरकार बने। बृजभूषण को क्षेत्र में पकड़, चुनाव प्रबंधन और मोदी फैक्टर का सहारा है।
-गठबंधन के चंद्रदेव को पिछले लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा को मिले मतों के आधार पर जीत का भरोसा है। उन्हें एससी, मुस्लिम व यादवों तथा ओबीसी के मत मिलने की उम्मीद है।
-कांग्रेस ने जातिगत समीकरण के हिसाब से ही ब्राह्मण प्रत्याशी उतारा है। इसके अलावा पार्टी को मुस्लिम व पार्टी के परंपरागत मतों के भरोसे चुनावी नैया पार होने की उम्मीद है।

तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है
कैसरगंज में चीनी मिलों को छोड़कर कोई बड़ा उद्योग नहीं है। हर साल घाघरा-सरयू की बाढ़ से तबाही होती है। जनकवि अदम गोंडवी का आटा गांव यहीं करनैलगंज में है। बदले पुरवा के रामकुमार दुबे ने बताया कि गांव ने चुनाव बहिष्कार का एलान किया तो अधिकारी दौड़े। इसके बाद मीटर लग गए हैं, तार जोड़ दिए, गांव जल्द रोशन होगा। गोंडवी ने ऐसे ही हालात पर लिखा था, ‘तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है।

बाहरी-स्थानीय का मुद्दा भी उठा
सुसेला (चौसेला) गांव के रिटायर्ड शिक्षक महावीर सिंह कहते हैं कि ज्यादातर लोग मोदी के नाम पर भाजपा को वोट दे रहे हैं। राजेंद्र प्रसाद कहते हैं कि भाजपा का मुकाबला गठबंधन से हैं लेकिन नेताजी (बृजभूषण) का पलड़ा भारी है। बसपा व कांग्रेस के प्रत्याशी बाहरी हैं।  एडवोकेट सूर्यकांत कहते हैं, देवीपाटन मंडल की सबसे बड़ी सब्जी व अनाज मंडी करनैलगंज है। अयोध्या के मंदिरों की यहां दुकानें हैं लेकिन आवागमन की सुविधा नहीं है। कहते हैं, मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए भाजपा को वोट देंगे। मोहसिन कहते हैं, कांग्रेस मजबूत चुनाव लड़ी तो गठबंधन की सीट निकल जाएगी। उन्होंने बताया कि यहां खुलकर कोई भी बृजभूषण के खिलाफ नहीं बोलता है। कैसरगंज में कई लोग ऐसे मिले जो सार्वजनिक तौर पर तो बृजभूषण की जीत बता रहे थे, लेकिन अकेले में कहा कि गठबंधन या कांग्रेस को वोट देंगे।

पांचों विधानसभा सीटों पर भाजपा
कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र में गोंडा जिले की तरबगंज, करनैलगंज और कटरा बाजार विधानसभा सीट तथा बहराइच की पयागपुर व कैसरगंज विधानसभा सीट आती हैं। सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा है। इनमें कैसरगंज से भाजपा विधायक व सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा अंबेडकर नगर लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार हैं।
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