आखिरी चरण के चुनाव में कांग्रेस के सामने चुनौती ही चुनौती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी स्वीकार कर रहे हैं कि एक-दो सीटों को छोड़ दें तो कांग्रेस कहीं भी मुकाबले में नहीं दिख रही है। वहीं, प्रियंका गांधी वाड्रा के वोट काटने वाले बयान से यह संदेश भी गया कि कांग्रेस के कमजोर प्रत्याशियों के स्थान पर गठबंधन के प्रत्याशी को वोट देना ज्यादा उचित रहेगा।
आखिरी चरण के चुनाव में जिन सीटों के लिए 19 मई को मतदान होगा, पिछले चुनाव में वहां कांग्रेस की स्थिति बेहद खराब रही थी। उसके प्रत्याशी जमानत बचाने लायक भी मत नहीं पा सके थे। इस बार भी स्थिति कोई खास बेहतर नहीं दिख रही है।
कांग्रेस के रणनीतिकार भी दबी जुबान से स्वीकार करते हैं कि कुशीनगर और कुछ हद तक महाराजगंज में ही उसके प्रत्याशी ठीक स्थिति में हैं। कुछ कांग्रेसी नेताओं का यह भी कहना है कि प्रियंका के उस बयान से भी मतदाता छिटक रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा कि जहां कांग्रेस कमजोर हैं, वहां भाजपा को नुकसान पहुंचाने के लिए प्रत्याशी उतारे हैं। इससे कांग्रेस का मतदाता गठबंधन प्रत्याशी की ओर रुख कर रहा है।
यहां बता दें कि आखिरी चरण में महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर और राबर्ट्सगंज में चुनाव है। कभी ये सीटें कांग्रेस या कम्युनिस्टों का गढ़ हुआ करती थीं। वर्तमान में दोनों ही पार्टियां यहां बेहद कमजोर स्थिति में हैं।