बसपा सुप्रीमो मायावती।
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इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच बात मायावती को ही मनुवादी बताने तक पहुंच गई है। चंद्रशेखर ने अपने एक फॉलोअर के ऐसे गंभीर आरोप को रीट्वीट कर सरगर्मी बढ़ा दी है। गठबंधन कर पार्टी का वोट शेयर बढ़ाने की लड़ाई में जुटी बसपा के लिए ऐसे सवाल चुनौती बन सकते हैं।
मायावती ने किए ये वार
- देश में एससी व ओबीसी वर्ग के अधिकतर संगठन व छोटी-छोटी पार्टियां चुनाव में बसपा को नुकसान पहुंचाने व एससी-ओबीसी विरोधी पार्टियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनी हैं। भाजपा जैसे दल ऐसी पार्टियों का अपने-अपने हिसाब से इस्तेमाल करते रहे हैं।
- दलितों का वोट बांटकर बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए ही बीजेपी भीम आर्मी के चंद्रशेखर को वाराणसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़वा रही है।
- भीम आर्मी को भाजपा ने ही षड्यंत्र के तहत बनवाया है और इसकी आड़ में भी अपनी अनुसूचित जाति विरोधी मानसिकता वाली घिनौनी राजनीति कर रही है।
- बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए एक-एक वोट बहुत कीमती है। इसे किसी हाल में बर्बाद न होने दें।
- मैंने 16 महीने रासुका में जेल किस पार्टी से दुश्मनी के तहत काटी? किस मुख्यमंत्री के विरोध के कारण आज भी मुझ पर 53 मुकदमे दर्ज हैं? कभी कहती हैं कांग्रेस का एजेंट है, कभी बीजेपी एजेंट बताती हैं। आपके ऐसे बयान बहुजन समाज को आपस में बांट ही रहे हैं।
- बहुजन विरोधी मनुवादी सवर्णों को टिकट दिए जा रहे हैं और मिशनरी कार्यकर्ताओं को एजेंट बताया जा रहा है। जिन सवर्णों को टिकट मिला है, उनका बहुजन मिशन में क्या योगदान है?
- कांशीराम की टीम के साथियों को एक-एक कर बसपा से निकलवा दिया। आज इतने बड़े विरोध के बावजूद ब्राह्मणवादी, संविधान विरोधी लोगों को टिकट देकर संसद में भेजने की तैयारी चल रही है।
- यूपी में अनुसूचित जातियों की आबादी करीब 21 फीसदी है। मायावती अर्से से इस वर्ग की सर्वमान्य नेता मानी जाती रही हैं।
- पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस वोट बैंक में सेंध लगाई है और मौजूदा लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ कांग्रेस की भी इस पर नजर है।
- भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ने अनुसूचित जाति के युवा नेता के तौर पर तेजी से पहचान बनाई है और अपनी गतिविधियों का केंद्र पश्चिमी यूपी तक सीमित न कर पूर्वांचल तक बढ़ाया है। दिल्ली और राजस्थान तक सक्रियता बढ़ाई है।
- चंद्रशेखर का वाराणसी से चुनाव लड़ने का एलान उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि पीएम नरेंद्र मोदी के सामने चुनाव लड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसूचित जाति के उभरते चेहरे के रूप में पहचान मिलने की संभावना।