सपा और कांग्रेस दोनों के ही प्रमुख नेताओं के मुताबिक, दोनों पार्टियों के बीच रिश्ते सहज नहीं चल रहे हैं। कांग्रेस को सीटें देने से पहले प्रत्याशी के नाम बताने की शर्त भी पसंद नहीं आ रही है। कांग्रेस का कहना है कि उनके यहां किसी प्रत्याशी का नाम एक निश्चित प्रक्रिया के तहत तय किया जाता है।
उस प्रक्रिया को अपनाये बिना नाम नहीं दिया जा सकता। फिर सपा ने फर्रुखाबाद जैसी लोकसभा सीट पर भी प्रत्याशी उतार दिया है, जहां से बातचीत की प्रक्रिया में शामिल पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद टिकट के दावेदार हैं। इसी तरह से लखीमपुर खीरी में भी उसके दावे पर विचार नहीं किया।
कांग्रेस ने अपनी पहली वरीयता वाली 26 सीटों के नाम बातचीत के दौरान दिए थे, इन सब सीटों पर स्थिति स्पष्ट किए बिना सीटों की घोषणा कांग्रेस नेतृत्व को रास नहीं आ रही है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की बसपा से दो स्तरीय बातचीत फिर से शुरू हुई है। इसका कोई भी नतीजा लोकसभा चुनाव के ऐन वक्त पर ही सामने आएगा।
दूसरी ओर, राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि रालोद और भाजपा के बीच बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। उचित प्लेटफार्म पर समझौते की शर्तों का उल्लेख हो चुका है। बस अब इसके नतीजे आधिकारिक रूप से सार्वजनिक होने का इंतजार है।