अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई में मोर्चा लेने वाले डॉ. राममनोहर लोहिया अपनी ही जन्मभूमि अकबरपुर में उपेक्षा के शिकार हैं।
यहां के अफसर उन्हें स्वतंत्रता सेनानी नहीं मानते। अकबरपुर ब्लॉक परिसर में लगे स्वतंत्रता सेनानियों की सूची वाले शिलापट में 23 सेनानियों के तो नाम हैं लेकिन लोहिया का नाम नदारद है।
अपर जिलाधिकारी राममूर्ति मिश्र का इस संबंध में कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इस संबंध में जानकारी जुटाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
23 मार्च 1910 को अकबरपुर में जन्मे डॉ. लोहिया यहां से प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद मुंबई से हाईस्कूल, बनारस से इंटर और कोलकाता से स्नातक किया।
इसके बाद परास्नातक करने के लिए जर्मनी चले गए। 1928 में साइमन कमीशन का बढ़ चढ़कर विरोध किया। पंडित जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात के बाद 1933 में वे स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े।
क्या बोले, अधिकारी
1942 में महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वालों में सबसे आगे रहे। प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन की बागडोर संभाली और आजाद भूमिगत नामक दस्ता बनाया। कई बार जेल भी गए।
जिलाधिकारी विवेक ने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर सेनानियों से जुड़े इस प्रकरण की छानबीन कराई जाएगी। महापुरुषों व सेनानियों का सम्मान हर हाल में तय होगा। यह दिखवाया जाएगा कि किन परिस्थितियों में शिलापट पर डॉ. लोहिया का नाम दर्ज नहीं है।
इन सेनानियों का दर्ज हैं नाम
केदारनाथ, गणेशकृष्ण जेतली, चंद्रलाल मेहरोत्रा, बल्ली, सूरज नरायन मेहरोत्रा, ओरी, गोवर्धन, चंद्रबली, झिनकूराम, दयाराम, देवशरण, नूरुलहसन अंसारी, भगौती सिंह, मथुरा प्रसाद, मेवालाल, रघुनाथ प्रसाद, राममिलन उपाध्याय, रामकिशन वर्मा, रामलौट, रामनाथ मेहरोत्रा, रामसुंदर, शंभूपाल व सभाजीत सिंह।