यात्रियों की संख्या के आधार पर विश्व बैंक ने मेट्रो रेल परियोजना का मदर डिपो मुंशी पुलिया पर बनाने की सलाह दी है। ऐसे में इस परियोजना का पूरा स्वरूप बदलने की आशंका पैदा हो गई।
पहले मेट्रो जो कि अमौसी से मुंशीपुलिया के बीच पहले चलाई जानी थी, उसे मुंशी पुलिया से शुरू कर अमौसी तक ले जाने की सलाह दी गई है।
दूसरी ओर लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने साफ कर दिया है कि डिपो का स्थान बदलने का कोई सवाल नहीं उठता है।
इसके लिए सबसे अच्छी लोकेशन 32वीं वाहिनी पीएसी ही है। मुंशीपुलिया पर इतना बड़ा डिपो बनाने के लिए कोई भी स्थान उपलब्ध नहीं है।
विश्व बैंक और एलएमआरसी के बीच इस मुद्दे पर मतभेद के चलते अब ऋण संबंधी मसला फंस सकता है। करीब 23 किमी. लम्बे नॉर्थ साउथ कॉरीडोर पर अब पहली मेट्रो आलमबाग से मुंशीपुलिया के बीच चलाए जाने का फैसला किया जा चुका है।
मगर दिल्ली में विश्व बैंक और एलएमआरसी के बीच हुई बैठक में यात्रियों की कम संख्या का एक विवाद फंस गया है।
बैंक के अधिकारियों ने यात्रियों की संख्या को देखते हुए आलमबाग से मुंशी पुलिया के बीच पहले काम शुरू करने का सुझाव दिया है। ऐसे मे पीएसी की 32वीं वाहिनी में डिपो बनाने प्रस्ताव ही खत्म हो जाएगा।
जहां की जमीन अधिग्रहण की कार्यवाही भी शुरुआती दौर में है। डीपीआर के मुताबिक मेट्रो यात्रियों की संख्या आलमबाग से महानगर के बीच सबसे ज्यादा है। इसके बाद महानगर से मुंशी पुलिया के बीच यात्री हैं।
अब तक की योजना में पहली मेट्रो अमौसी से आलमबाग जानी थी लेकिन डीपीआर में इस रूट पर काफी कम यात्री हैं।
वर्ल्ड बैंक की टीम ने 14 दिसंबर से 17 दिसंबर तक लखनऊ मेट्रो के डीपीआर और उसकी जमीनी चुनौतियों का अध्ययन करने के बाद मानकों का हवाला देकर सिफारिश की है कि अमौसी से आलमबाग के बजाए पहले चरण में मुंशी पुलिया से शुरुआत की जानी चाहिए।
दूसरी ओर एलएमआरसी ने इस सुझाव को मानना लगभग असंभव बता दिया है।
इन दोनों पक्षों का यह मतभेद अगर कायम रहा तो विश्व बैंक की मदद लखनऊ मेट्रो परियोजना के लिए केवल तकनीकी सलाहों तक ही सीमित रहेगा न कि, ऋण पर बात बनेगी।