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KGMU से ग्रीन कोरिडोर बनाकर 23 मिनट में दिल्ली के लिए रवाना किया लिवर

Thu, 28 Jul 2016 12:12 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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केजीएमयू के बाहर खड़ी एंबुलेंस - फोटो : amar ujala
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लखनऊ के केजीएमयू से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एक मानव लिवर को 23 म‌िनट में अमौसी एयरपोर्ट पहुंचाया गया। केजीएमयू से लिवर लेकर एंबुलेंस 11 बजे निकली। बता दें ‌क‌ि केजीएमयू के शताब्दी हॉस्पिटल से एयरपोर्ट की दूरी 28 किमी है। अस्पताल प्रबंधन और पुल‌िस और ट्रैफ‌िक पुल‌िस की सतर्कता से ये दूरी महज 23 म‌िनट में तय की गई।
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इससे पहले भी ग्रीन कोर‌िडर बनाकर ल‌िवर द‌िल्ली भेजा जा चुका है तब एंबुलेंस को एयरपोर्ट पहुंचने में 27 म‌िनट लगे थे।

लखनऊ ट्रैफिक पुलिस ने मेडिकल इमरजेंसी के चलते रूट क्लीयर कराने व ट्रैफिक कर्मियों को अलर्ट रहने का मैसेज जारी कराया। इसके बाद चौराहों पर ट्रैफिक सिपाही व पुलिस सतर्क हो गई।

एंबुलेंस केजीएमयू से निकली तो उसके आगे 110 की रफ्तार से इंटरसेप्टर, एएसपी ट्रैफिक और एमसीआर की गाड़ियां सायरन बजाते हुए चल रही थीं। 
 
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क्या होता है ग्रीन कोरिडोर

केजीएमयू से ल‌िवर ले जाती एंबुलेंस - फोटो : amar ujala
कई बार आपने खबरों में देखा और पढ़ा होगा कि ग्रीन कोरिडोर बनाकर मरीज की जान बचाई गई। 

दरअसल ग्रीन कोरिडोर उस स्थिति में बनाया जाता है जब किसी संवेदनशील अंग को ट्रांसप्लांट के लिए एक जगह से दूसरे जगह कम से कम समय पर पहुंचाना होता है।

ज्यादातर दिल, किडनी या लिवर जैसे संवेदनशील अंगों को पहुंचाने के लिए ग्रीन कोरिडोर बनाए जाते हैं। कई मरीज मृत्यु के बाद अपने अंग दान करते हैं और दूसरे अस्पताल में उन्हें कम से कम समय में पहुंचाना होता है तब ग्रीन कोरिडर बनाते हैं। 
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