लखनऊ। प्रदेश के निजी अस्पतालों के ऑनलाइन पंजीकरण का ब्योरा सार्वजनिक करने के मामले को शासन ने संज्ञान में लिया है। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य ने डीजी हेल्थ को व्यवस्था लागू कराने के निर्देश दिए हैं। सूची ऑनलाइन करने में आ रही अड़चन की कमियां दूर कर एक से दो माह के भीतर व्यवस्था लागू करने का दावा किया है।
राजधानी में करीब एक हजार निजी अस्पताल व क्लीनिक हैं। इनमें से किसी भी अस्पताल का ब्योरा ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कई अस्पताल अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं। हालांकि, जनहित पोर्टल पर अस्पताल पंजीकृत हैं, मगर आमजन इसे नहीं देख सकते। ऐसे में लोगों को यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि कौन से अस्पताल वैध हैं और कौन से अवैध। पारदर्शिता की यह कमी अवैध अस्पतालों को बढ़ावा दे रही है। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण को ऑनलाइन व्यवस्था लागू कराने के निर्देश दिए हैं।