सूत्रों का कहना है कि आबकारी विभाग ने भी यह जानने के लिए कि शराब की बिक्री में कितनी गिरावट आई है, प्रयागराज में कुछ दुकानों पर सैंपलिंग कराई। शहरी क्षेत्रों की आठ दुकानों पर की गई सैंपलिंग में लॉकडाउन से पहले जहां देशी शराब की बिक्री 315000 लीटर प्रतिदिन थी, वहीं 4 मई को जब दुकानें खुलीं तो यह बिक्री डबल हो गई और 620820 लीटर शराब बिकी। लेकिन उसके बाद से हर दिन इसमें गिरावट दर्ज की गई। 13 मई को मात्र 119110 लीटर ही शराब बिकी।
इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग आठ दुकानों पर लॉकडाउन से पहले प्रतिदिन की सेल 443000 की होती थी। 4 मई को दुकानें खुलीं तो 820380 लीटर शराब की बिक्री 4 मई को हुई। उसके बाद से लगातार मांग में कमी आने लगी। 13 मई के आंकड़े के मुताबिक लगभग 187760 लीटर शराब की ही बिक्री हुई। यानी लॉकडाउन से पहले की तुलना में 60 से 66 प्रतिशत तक की गिरावट बिक्री में आ गई।
शराब विक्रेता वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एसपी सिंह कहते हैं कि लॉकडाउन के बाद पहले दिन शराब की बिक्री में उछाल आना स्वाभाविक था। लेकिन उसके बाद गिरावट का भी अनुमान पहले से लगाया जा रहा था। एसपी सिंह बिक्री की गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह पीक आवर में शराब की दुकानों को बंद रहना मान रहे हैं।
उनका कहना है कि शराब की मुख्य बिक्री रात 7 बजे से 10 बजे के बीच होती थी लेकिन अब सात बजे हर हाल में दुकान बंद कर देनी है। इसके अलावा कैंटीन बंद होना और मॉडल शॉप पर शराब पीने की इजाजत न मिलना भी एक वजह है। वहीं शादी-विवाह या अन्य पार्टी में शहरी क्षेत्रों में शराब की खपत बड़ी मात्रा में होती थी, लेकिन वह भी बंद है। वहीं देशी शराब की मांग मजदूरों की वजह से कम हुई है। मजदूरों के पास काम नहीं है तो शराब के लिए पैसे भी नहीं हैं।
एसपी सिंह ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों के सामने मांग रखी है कि अप्रैल की फीस माफ की जाए और बाकी कोटे की व्यवस्था को समाप्त किया जाए, नहीं तो शराब कारोबारियों का बड़ा घाटा होगा। वहीं आबकारी आयुक्त पी गुरुप्रसाद का कहना है कि डिस्टिलरी में पूरे प्रदेश में सबसे बेहतर उत्पादन यूपी में हो रहा है। सप्लाई चेन में कोई रुकावट नहीं है। फीस माफ करने या कोटा की व्यवस्था समाप्त करना शासन स्तर पर ही संभव है। ऐसे में स्थिति सामान्य होने तक कोई निर्णय होगा, इस पर संशय बना हुआ है।