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शेरों का शेर ‘प्रिंस’ नहीं रहा, बढ़ती उम्र केचलते हो चला था कमजोर

Sun, 31 Dec 2017 01:39 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
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दुखद ! प्रिंस अब नहीं रहा...। न राजधानी के सिर्फ नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान बल्कि पूरे प्रदेश का ऐसा इकलौता बब्बर शेर, जो अपने नाम को जीता था। दर्शक उसकी चहलकदमी देखने, एक झलक पाने के लिए दूर-दूर से आकर प्राणि उद्यान में घंटों इंतजार करते थे। प्रदेश की वाइल्ड लाइफ में बात जब बब्बर शेर की होती तो शुरुआत प्रिंस से होती और उसी पर आकर ठहर जाती। अपनी आन-बान और शान के चलते पिछले 14 सालों तक वह प्रदेश में शेरों का ब्रांड एम्बेसडर रहा।
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प्रिंस 21 साल से अधिक का था। पिछले कुछ समय से बीमार था। नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के निदेशक आरके सिंह ने बताया कि सामान्यत: शेर की उम्र 17 से 18 साल तक होती है। नियमित दिनचर्या और विशेष रखरखाव के चलते कुछ बढ़ जाती है उम्र। प्रिंस ने शनिवार की सुबह दम तोड़ा। जू स्टाफ का कहना है कि यह प्रदेश का सबसे बुजुर्ग बब्बर शेर था। पोस्टमार्टम में चिकित्सकों ने पाया कि उसके कई जरूरी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। पोस्टमार्टम के बाद उसे अफसरों की निगरानी में प्राणि उद्यान परिसर में के विद्युत शवदाह गृह में जला दिया गया।

 ...पर वह तो था यारों का यार
यह अलग बात है कि प्रिंस को देखने लोग घंटों बाड़े के सामने टकटकी बांधे खड़े रहते थे, पर क्या मजाल की कोई बाड़े के करीब पहुंचने की कोशिश करे। उसकी बड़ी कदकाठी जितना ही लोगों को लुभाती थी, उतना ही डराती भी थी। पर वह तो यारों का यार था। लंबे समय तक उसकी देखभाल करने वाले कीपर मुबारक, हसन और मतीन से उसकी गाढ़ी छनती थी।
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मुबारक और हसन से तो उसका गजब का याराना था। जब भी वे उसके बाड़े में जाने के लिए गेट खोलते, प्रिंस सीधे उनके पास पहुंच जाता। वह उनकी आहट पहचानता था, उसे मालूम होता कि उसके लिए कुछ खासा लाया गया है। अपने यार को खोकर उसके पर्सनल कीपर कहते हैं कि हमने तो अपना जिगरी दोस्त खो दिया।
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