लॉयन सफारी में शेरनी लक्ष्मी की मौत के 17 दिन बाद रविवार को बब्बर शेर विष्णु ने भी दम तोड़ दिया। लाइलाज वायरल से जूझ रहे विष्णु ने सुबह साढ़े आठ बजे अंतिम सांस ली। छह डाक्टरों की टीम ने शेर के शव का पोस्टमार्टम किया। शरीर के कई अंगों को जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
ये अंग बरेली की आईबीआरआई प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। शनिवार को विष्णु कोमा में चला गया था। तभी से उसके मरने की आशंका जताई जाने लगी थी। हैदराबादी शेरनी सफारी में महज 52 दिन तो शेर 68 दिन जिंदा रहा। दो शेरों की मौत से इटावा लायन सफारी में जश्न से पहले मातम पसर गया है।
लॉयन सफारी में चार जोड़ा शेरों में विष्णु व लक्ष्मी को सबसे आखिर में कानपुर प्राणी उद्यान से 10 सितंबर को यहां लाया गया था। यहां लाते समय शेर व शेरनी घायल हो गए थे। ट्रीटमेंट के लिए कानपुर जू से वेटनरी चिकित्सक डॉ. आरके सिंह को यहां बुलाया गया था।
गत 23 सितंबर से शेरों का यह जोड़ा ऐसे खतरनाक वायरल की चपेट में आया कि डाक्टरों के तमाम प्रयास उन्हें बचा न सके। 30 अक्टूबर को इस जोड़े की शेरनी लक्ष्मी की मौत हुई। 17 दिन बाद 16 नवंबर को विष्णु शेर की भी मौत हो गई।
मीट नहीं खिलाए गए अंडे
इलाज में जुटे डाक्टर भी मान कर चल रहे थे कि एक समान वायरल से संक्रमित होने की वजह से नर शेर का बचना मुश्किल है। फिर भी कोशिशें जारी रखी गईं। इस जोड़े को सफारी प्रशासन ने बीमार पड़ते ही सफारी के वेटनरी हास्पिटल में रख दिया था।
इलाज में मथुरा, आगरा, बरेली, लखनऊ, गुजरात आदि जगहों के विशेषज्ञ डाक्टरों का परामर्श लिया गया। तरह-तरह की चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनाई गई। आरबीआरआई बरेली समेत कई प्रयोगशालाओं व मेडिकल कालेजों में खून के सैंपल भेजे गए। कोई भी कवायद कारगर नहीं रही।
विष्णु शेर जब से बीमार पड़ा, उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। शुरुआत में 5 साल के शेर का वजन करीब साढ़े तीन कुंतल था। वह घटकर करीब डेढ़ कुंतल के आसपास रह गया। 30 अक्तूबर से शेर ने मीट खाना भी छोड़ दिया था। उसे अंडों के सहारे जिंदा रखने के प्रयास हुए।
उसके शरीर के अंगों पर लकवा का असर गहराता गया। डाक्टरों के अनुसार पहले उसकी पूंछ में ड्रिप लगाई जाती थी।
डॉक्टरों ने किया शेर का पोस्टमार्टम
शनिवार को गर्दन में ड्रिप लगाकर ग्लूकोज चढ़ाया गया। विष्णु शनिवार रात से कोमा में था। रविवार सुबह 8:30 बजे उसकी मौत हो गई। छह डाक्टरों की टीम ने सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक पोस्टमार्टम किया।
शेर के मृत शरीर से लिवर, फेफड़ा, किडनी, स्प्लीन, आंत, ब्रेन व हार्ट के सैंपल लिए। डीएफओ मानिक चंद्र यादव एवं सफारी डायरेक्टर केके सिंह की मौजूदगी में शेर के शव को जलाकर नष्ट कर दिया गया।