बिजली पोल पर काम के दौरान शट डाउन के बावजूद उपकेंद्र से बिजली चालू कर दी गई। करंट की चपेट में आकर झुलसने के बाद वह पोल से नीचे गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
ग्रामीणों ने गोसाईगंज के जेई मनोज जायसवाल व एसडीओ ओपी पाल को सूचना देकर मौके पर बुलाया, मगर वे नहीं पहुंचे। उल्टे रामानंद को अपना कर्मचारी मानने से ही इन्कार कर दिया।
ग्रामीणों ने लापरवाह एसडीओ और जेई पर कार्रवाई की मांग की। साथ ही मृतक के परिवारीजनों को बीस लाख मुआवजा व नौकरी देने की मांग करने लगे। हाईवे जाम की सूचना पर एसपी ग्रामीण डॉ. सतीश कुमार कई थानों की फोर्स लेकर मौके पर पहुंचे।
लेकिन लोग अपनी मांग पर अड़े रहे। तब पुलिस अफसरों ने लेसा के इंजीनियरों से बात की। इसके बाद तहसीलदार शंभु शरण व एसडीओ मोहनलालगंज संजय त्रिवेदी वहां पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
लेकिन लोग अपनी मांग पर अड़े रहे। तब पुलिस अफसरों ने लेसा के इंजीनियरों से बात की। इसके बाद तहसीलदार शंभु शरण व एसडीओ मोहनलालगंज संजय त्रिवेदी वहां पहुंचे।
एसडीओ ने मृतक के परिवारीजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा एवं तीन महीने में पूरनपुर उपकेंद्र में मृतक की पत्नी ममता को संविदा पर नौकरी देने का आश्वासन दिया।
साथ ही तहसीलदार ने किसान बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपये एवं मुख्यमंत्री सहायता कोष से आर्थिक मदद दिलाने का लिखित आश्वासन दिया। तब दो घंटे बाद सड़क जाम खत्म हुआ। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
मृतक रामानंद परिवार का अकेला कमाने वाला था। मां की मौत के बाद पत्नी ममता व दो वर्षीय बेटी प्राची के साथ ही बुज़ुर्ग पिता महावरी की जिम्मेदारी भी रामानंद के कंधों पर थी। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था।
बिजली हादसे का शिकार रामानंद लेसा का संविदा कर्मचारी नहीं था। जिस फीडर पर घटना हुई उसका संविदाकर्मी सचिन एवं लाइनमैन भगवान दीन है। शट डाउन सचिन ने लिया था। बिजली कैसे चालू हो गई, इसकी जांच की जा रही है। - ओपी पाल, उपखंड अधिकारी गोसाईगंज लेसा सिस गोमती