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जानिए, क्यों लंबे हो रहे हैं आजकल के लड़के-लड़कियां

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राजधानी के लोगों की जीवन शैली में सुधार हुआ है और इसका नतीजा यह है कि नई पीढ़ी की लंबाई भी पहले की तुलना में बढ़ गई है। 1990 के दशक में जहां औसत लंबाई 181 सेमी होती थी, वह अब 182.8 सेमी हो गई है।
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यह दावा है एसजीपीजीआई और चिकित्सा व आर्थिक मुद्दों पर काम कर रहे संस्थानों का। किशोरों की लंबाई, वजन और बीएमआई को लेकर केंद्रित अध्ययन के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। दो दशक और पूर्व उत्तर भारत में हुए अध्ययनों से तुलना करते हुए लखनऊ के किशोरों पर यह अध्ययन किया गया।

राजधानी के करीब तीन हजार आठ सौ बच्चों पर किए इस अध्ययन को एसजीपीजीआई के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग की डॉ. विजय लक्ष्मी भाटिया, अभिषेक कुलकर्णी, एक अन्य चिकित्सालय की डॉ. प्रियंका गुप्ता और दिल्ली यूनिवर्सिटी की दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की डॉ. नित्या मित्तल व अन्य की टीम ने मिलकर अंजाम दिया।
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इस रिपोर्ट में मुख्य तौर पर मध्यम वर्ग के परिवारों से ताल्लुक रखने वाले किशोरों को शामिल किया गया। अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक लखनऊ के मध्यम वर्ग के किशोर आज भी आधुनिक लाइफ स्टाइल और खान-पान से बहुत प्रभावित नहीं हुए हैं।

ऐसे में उन्हें बेहतर पोषण मिल रहा है। वहीं अध्ययन में 18 वर्ष से कम उम्र के 2,027 लड़के और 1,767 लड़कियां शामिल की गई थीं। उनके शारीरिक परीक्षण से मिली रिपोर्ट की तुलना 1992 की अग्रवाल अध्ययन रिपोर्ट से की गई जो मुख्यत: उच्च वर्ग के किशोरों के बीच राष्ट्रीय और सेंट्रल जोन (जिसमें लखनऊ प्रमुख रूप से शामिल था) पर आधारित थीं।
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लड़कियों की भी बढ़ रही लंबाई

विशेषज्ञों के अनुसार, 20 साल पहले के मुकाबले स्थितियां बदल गई हैं। लखनऊ के किशोर तेजी से लंबे हो रहे हैं। खास बात है कि मध्यम औसत ऊंचाई के वर्ग में भी यह वृद्धि हो रही है। दो दशक पहले औसत लंबाई जहां 167.9 फीट थी, वह अब 171.7 फीट हो गई है।

लड़कियों के मामले में भी यही रुझान देखने को मिल रहा है। उनमें भी अधिकतम औसत ऊंचाई में 1.9 सेमी की वृद्धि हुई है, वहीं मध्यम औसत ऊंचाई में भी यह 1.1 सेमी की वृद्धि आई है।

सर्वे टीम के विशेषज्ञों का कहना है कि एक ओर शहरी परिवारों की आर्थिक स्थितियां बेहतर हुई हैं तो वहीं दूसरी ओर पोषण भी सुधरा है। ऐसे में औसत ऊंचाई बढ़ना स्वाभाविक है। वहीं जेनेटिक वजहें भी इसमें शामिल हैं। अच्छी आर्थिक स्थितियां, पोषण और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने पर नई पीढ़ी में औसत ऊंचाई का एक सीमा तक बढ़ना तय है।
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