नियामक आयोग चेयरमैन आरपी सिंह, सदस्य कौशल किशोर शर्मा व विनोद कुमार श्रीवास्तव की पूर्ण पीठ ने परीक्षण के बाद 2020-21 के लिए बिजली कंपनियों का लगभग 70,792 करोड़ रुपये का एआरआर स्वीकार करने का आदेश जारी किया।
आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि कोविड-19 महामारी व अन्य कारणों से एआरआर व टैरिफ निर्धारण में पहले से ही काफी विलंब हो चुका है, इसलिए एआरआर व अन्य याचिकाओं को आगे की प्रक्रिया के लिए स्वीकार कर लिया गया है।
आदेश में कहा गया है कि एआरआर स्वीकार करने तक राज्य सरकार के नियंत्रण वाली बिजली कंपनियों की ओर से लगभग 4500 करोड़ रुपये के घाटे की भरपाई के लिए दरों में बढ़ोत्तरी का कोई प्रस्ताव दाखिल नहीं किया गया है। ऐसे में बिजली कंपनियों की ओर से दाखिल एआरआर के आंकड़ों को ही तीन दिन में समाचार पत्रों में प्रकाशित कराया जाए, जिससे उपभोक्ता व अन्य हितधारक अपनी आपत्तियां व सुझाव दाखिल कर सकें। आदेश में बिजली कंपनियों द्वारा कुछ सूचनाएं व आंकड़े दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने का भी उल्लेख किया गया है।
बिजली कंपनियों की ओर से एआरआर दाखिल किए जाने के बाद से ही राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद दरें बढ़ाने के खिलाफ लामबंदी में जुटा है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि अब बिजली कंपनियां दरों में बढ़ोत्तरी नहीं करा पाएंगी क्योंकि आयोग ने अपने आदेश में घाटे के एवज में टैरिफ प्रस्ताव दाखिल न किए जाने का उल्लेख अपने आदेश में कर दिया है। ऐसे में नियमानुसार अब बिजली कंपनियां कोई भी प्रस्ताव दाखिल नहीं कर पाएंगी।
उपभोक्ता परिषद ने आयोग को लिखित प्रस्ताव दिया है कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं के पक्ष में उदय व ट्रू-अप का 2017-18 तक लगभग 13337 करोड़ रुपये निकल रहा है। आयोग ने भविष्य में इस राशि को उपभोक्ताओं को हस्तांतरित करने की बात भी कही थी। अब आयोग को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए।
सार्वजनिक सुनवाई का शिड्यूल
दक्षिणांचल व पश्चिमांचल वितरण निगम व केस्को 10 अगस्त पूर्वाह्न 11 बजे से
मध्यांचल व पूर्वांचल वितरण निगम13 अगस्त पूर्वाह्न 11 बजे से