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Lucknow News: हज में पांच दिनों की इबादत के तरीके सिखाए

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लखनऊ। इस्लामी माह जिलहिज्ज की आठ से बारह तारीख में हरम शरीफ और मदीना मुनव्वरा में इबादत करना हज कहलाता है। हज के दौरान औरतों के अपने कपड़े ही एहराम है। मर्द का एक चादर को ओढ़ना और एक चादर को पहनना एहराम (हज के दौरान पहने जाने वाले कपड़े) कहलाता है।
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आजमीन-ए-हज को एहराम बांधने के साथ सोमवार को हज की पांच दिनों की इबादत के तरीके सिखाए गए। मौका था सरोजनीनगर स्थित मौलाना अली मियां मेमोरियल हज हाउस में आयोजित हज प्रशिक्षण शिविर का। इसमें 507 यात्रियों को हज अदा करने के तरीकों की जानकारी दी गई।

राज्य हज कमेटी की ओर से आयोजित प्रशिक्षण शिविर में आजमीन-ए-हज को राज्य हज कमेटी के ट्रेनर शारिक अलवी, एजाज अहमद, मौलाना आफताब नदवी, अब्दुल वहाब और नाहिद रहमान ने हज की अहमियत बताई। शारिक अलवी ने कहा, उमरा या हज करने के लिए सबसे पहला काम एहराम बांधना है। महिला हज यात्रियों को हज अदा करने के तरीके समझाते हुए नाहिद रहमान ने सिर पर कपड़ा बांधने के लिए कहा, ताकि बालों को टूटने से बचाया जा सके। एजाज अहमद ने बताया कि हज के दौरान एहराम बांधना, तवाफ करना (खाना-ए-काबा के सात चक्कर लगाना), सफा मरवा के बीच सई करना (चक्कर लगाना) जरूरी है।
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उन्होंने बताया कि एहराम बांधने के बाद सिले कपड़े पहनना, नाखून और बाल काटना मना है। राज्य हज कमेटी के सचिव एसपी तिवारी ने हज यात्रियों को हज गाइड का वितरण किया। हज कमेटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जावेद खान और आरिफ रऊफ ने हज सुविधा एप के इस्तेमाल की जानकारी दी।
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