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कभी यूपी की राजनीति के बड़े चेहरे रहे मुलायम अब मैनपुरी तक हुए सीमित, ये दिग्गज भी हुए दूर

Thu, 25 Apr 2019 03:37 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुलायम सिंह यादव - फोटो : amar ujala
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कभी चुनावी समर में जिन चेहरों का जलवा बिखरा करता था। हर सीट पर डिमांड हुआ करती थी। जिनकी सभाएं जीत की उम्मीद बढ़ा दिया करती थीं, उनमें से कई चेहरे इस बार समर भूमि से दूर बैठे हैं। कुछ हैं भी तो उनका पहले वाला रंग नहीं दिख रहा। वहीं, कुछ मौजूदा पदों की सीमाओं की वजह से सियासी समर से दूर हैं तो कुछ को उम्र और हालात ने किनारे बैठने पर मजबूर कर दिया।

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बदल गई भूमिका
अवध, खास तौर से लखनऊ की चुनावी जंग में लालजी टंडन की चर्चा लाजिमी है। आजादी के बाद से आज तक लखनऊ का शायद ही कोई चुनाव ऐसा रहा होगा जिसमें लालजी टंडन मंचों पर न दिखते हों। पर, कल्याण सिंह और केशरीनाथ त्रिपाठी की तरह वह भी अब राज्यपाल की भूमिका में हैं।

मंचों से गायब हो गए ये बड़े नेता
ओमप्रकाश सिंह भाजपा के बड़े कुर्मी नेता माने जाते थे। वह प्रदेश सरकार में कई बार कैबिनेट मंत्री रहे। एक बार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। पिछले चुनाव तक ओमप्रकाश सिंह भाजपा के चुनावी अभियान का हिस्सा हुआ करते थे, पर इस बार मंचों से गायब हैं। दूसरे दलों की बात करें तो समाजवादी खेमे के बेनी प्रसाद वर्मा भी कुर्मियों के बड़े चेहरा माने जाते हैं।

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पिछले चुनाव में हार के बाद सबकुछ बदल गया

सपा में मुलायम सिंह के बाद सबसे कद्दावर नेता बेनी बाबू पिछले चुनाव तक तराई क्षेत्र से लेकर अवध के जिलों में कुर्मी वोटों की दिशा तय करने वाला चेहरा कहे जाते थे। सपा से कुछ मतभेदों के चलते कांग्रेस में गए तो वहां भी बड़ा पिछड़ा चेहरा का तमगा रहा।

पिछले लोकसभा चुनाव में वह गोंडा से कांग्रेस के टिकट पर हारे क्या, मानो सब कुछ बदल गया। फिलहाल वह सपा में लौट आए हैं और राज्यसभा के सदस्य भी हैं, पर सपा के चुनाव प्रचार अभियान से गायब हैं।

भगवती सिंह भी कभी सपा के चुनाव अभियान का अहम हिस्सा हुआ करते थे। लोकसभा के पिछले चुनाव तक वह सक्रिय रहे, पर उन पर हावी हो चुकी उम्र ने उन्हें भी समर भूमि से दूर बैठा दिया है।
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इनकी सक्रियता भी सीमित

लोकसभा के पिछले चुनाव में सपा प्रत्याशियों को अपनी जीत के लिए नेताजी मुलायम सिंह यादव काफी जरूरी लगा करते थे। वक्त बदला और सपा के समीकरण भी बदले। प्रदेश में लोकसभा की लगभग आधी सीटों की चुनावी जंग लड़ी जा चुकी है, पर कभी उत्तर प्रदेश के चुनाव का सबसे चर्चित चेहरा रहने वाला यह सियासी दिग्गज अपने संसदीय क्षेत्र मैनपुरी तक सीमित होकर रह गया।

लखनऊ के पूर्व महापौर डॉ. दाऊजी गुप्त भी कभी प्रत्याशी के रूप में तो कभी मंच पर वक्ता तो कभी समर्थक के रूप में चुनावी चौपालों का अहम हिस्सा रहते थे। मौजूदा चुनाव में उनकी पहले जैसी सक्रियता नहीं दिख रही।

स्वामी चिन्मयानंद और डॉ. रामविलास वेदांती जैसे चेहरे भी एक समय भाजपा का चुनावी मंच सजाया करते थे। इस बार ये भी नहीं दिखाई दे रहे।
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