फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शीशमहल पर चुप्पी, नजर आया एलडीए का दोहरा चेहरा

Sun, 09 Nov 2014 04:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
शासन सख्त हुआ तो एलडीए ने अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान तो छेड़ दिया लेकिन पहले ही दिन उसका दोहरा चेहरा सामने आया।
विज्ञापन


एक तरफ ताबड़तोड़ अंदाज में अभियान शुरू करते हुए दो इमारतें सील कीं और 2000 अवैध निर्माण ढहाने का दावा किया।

वहीं दूसरी ओर शीश महल तालाब के आसपास अवैध निर्माणों पर मुख्य सचिव आलोक रंजन के ऑब्जेक्शन के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इस चुप्पी पर टालमटोल भरा रवैया दिखाते हुए कहा गया कि यहां सर्वे किया जा रहा है।

यह एलडीए की लचर कार्यशैली का ही नतीजा है कि जहां 2000 निर्माण को ढहाने की बात कही जा रही है, पिछले दो साल में सिर्फ दो अवैध इमारतों पर ही एलडीए का हथौड़ा चला।

उपाध्यक्ष का दावा है कि वे जिस कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं, उसको देखते हुए जल्द ही बड़ा असर दिखना शुरू हो जाएगा।

बिल्डरों के सिर पर लटकी तलवार

एलडीए वीसी अष्टभुजा प्रसाद तिवारी ने कहा है कि ऐसे निर्माण जिनको ढहाने का आदेश हो चुका है और कोर्ट से कोई रोक भी नहीं है, उनको ध्वस्त कर दिया जाए।

इसके अलावा सील इमारतों में दोबारा काम शुरू करवाने वाले बिल्डरों पर मुकदमे की तलवार भी लटक रही है।

इस जद में कई रसूखदार भी हैं, जिनके खिलाफ अभियान चलाना एलडीए के लिए चुनौती भी होगी।

ऐसी कम से कम 200 इमारतें राजधानी में हैं, जहां पिछले दो साल में सीलिंग के बावजूद निर्माण किया जाता रहा। अभियान की रूपरेखा तय कर दी गई है।

दोनों अधीक्षण अभियंताओं दुर्गेश श्रीवास्तव व योगेश पाठक से सारे काम वापस लेकर केवल अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाने का काम ही दे दिया गया है।

वहीं आदेश पालन की जद में आ रहे रसूखदार बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई भी एलडीए के लिए चुनौती होगी।
विज्ञापन

एलडीए की कार्रवाई का सच

अभियंताओं-बिल्डर का गठजोड़ और रसूखदारों की पहुंच के आगे कोई सख्ती नहीं चल पा रही है। कई नेताओं का काला धन इन अवैध अपार्टमेंट्स में लग रहा है।

ऐसे में अगर बमुश्किल किसी इमारत के खिलाफ कार्रवाई शुरू होती भी है तो, अधिकारियों पर इस कदर दबाव डाल दिया जाता है कि चाह कर भी कार्रवाई संभव नहीं होती है।

इनको बनवाने के पीछे हर महीने का करोड़ों रुपये का अर्थशास्त्र है। एक ओर जहां प्राधिकरण की खुद की वेबसाइट पर 750 से अधिक ऐसे अवैध निर्माणों की सूची है, जिनको तत्काल ध्वस्त किया जाना जरूरी है।

ये लिस्ट करीब पांच साल पुरानी है, ऐसी इमारतों की सूची अब 2000 तक पहुंच चुकी है। दूसरी ओर 22 इमारतों की सूची प्राधिकरण हाईकोर्ट में जमा कर चुका है, इनमें से एक भी इमारत का बाल-बांका न हुआ।

एलडीए वीसी ने सख्ती दिखाई तो दूसरे शनिवार की छुट्टी के बावजूद अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई।

अशोक मार्ग पर दो इमारतें सील कर काम रोका गया लेकिन शीश महल तालाब के पास कार्रवाई ही रोक दी गई है और सर्वे भी शुरू किया गया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें