एलडीए ने अवैध निर्माण पर लगाम लगाने के लिए अब ऐसे निर्माण करने वालों को सभी तरह की सुविधाओं से वंचित करने की योजना बनाई है। प्राधिकरण का मानना है यदि व्यापार कर, नगर निगम, जल संस्थान, रजिस्ट्री विभाग, लेसा, पुलिस और रजिस्ट्री विभाग ऐसे लोगों को कोई सुविधा न दें तो अवैध निर्माण होगा ही नहीं।
यही नहीं एलडीए ने यह भी कहा है जहां अवैध निर्माण के बावजूद बिजली-पानी कनेक्शन जैसी सुविधाएं दी गई हैं उन्हें भी तत्काल निरस्त कर दिया जाए। शनिवार को बाकायदा अधिसूचना जारी कर एलडीए ने अपने अलावा सात अन्य एजेंसियों को भी अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार माना है।
इस अधिसूचना के तहत व्यापार कर, नगर निगम, जल संस्थान, रजिस्ट्री विभाग, लेसा, पुलिस और रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों पर भी अब अवैध निर्माण को लेकर एलडीए कार्रवाई करेगा। अवैध निर्माणों को सुविधाएं देने के लिए संबंधित सरकारी एजेंसियों के जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी।
इसके अलावा आम लोगों को एक बार फिर से चेताया गया है कि किसी भी तरह के अवैध निर्माण से दूर रहें। बिना मानचित्र पास करवाए निर्माण न करवाएं और मानचित्र पास करवाने पर उसी के अनुरूप निर्माण करवाएं।
बिना एलडीए से कंप्लीशन प्राप्त किए भवनों को लोन से लेकर पानी, व्यापार कर पंजीकरण और बिजली से लेकर रजिस्ट्री तक पर प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर एलडीए ने तैयारी शुरू कर दी है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने विभिन्न विभागों और एजेंसियों को पत्र लिख कर ऐसे भवनों, फ्लैट, आवासीय योजनाओं को मान्यता न देने के लिए पत्र लिखा है।
ताकि, तमाम ढांचागत सुविधाएं सरकारी एजेंसियों से अवैध निर्माण करने वालों को न मिल सकें। उपाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार सिंह ने सभी बैक, व्यापार कर, पाॅवर कार्पोरेशन, जल संस्थान, महानिरीक्षक निबंधन एवं नगर निगम से अनुरोध किया है कि किसी भी भवन का प्राधिकरण से पूर्णता प्रमाण पत्र जारी होने के बाद ही अपने विभाग से संबंधित सुविधा प्रदान करें।
बैंक ऋण, लेसा द्वारा विद्युत, जल संस्थान से पानी कनेक्शन दिए जाएं। प्राधिकरण से अनापत्ति प्राप्त होने के पश्चात व्यावसायिक कर निर्धारण, व्यवसाय के लिए लाइसेंस, व्यापार कर पंजीकरण किया जाए। प्राधिकरण से अनापत्ति लेने के पश्चात ही भूखंडों, भवनों और फ्लैटों के अनुबंध और निबंधन किए जाएं।