एलडीए के अफसराें को करोड़ों रुपये की संपत्तियों के डाटा के रखरखाव की सुरक्षा की चिंता रत्तीभर नहीं है। जिसका नतीजा है, अब तक 498 भूखंडों का डाटा बदलने का कारनामा प्राधिकरण में हो चुका है।
इसके पीछे तीन वजहें सामने आई हैं। पहली यह है कि सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ करने वाले का आईपी एड्रेस सुरक्षित करने का विकल्प नहीं है।
दूसरा, 2011 का बना सॉफ्टवेयर आज तक अपडेट ही नहीं किया गया। तीसरा कारण है, तीन साल पहले बहुराष्ट्रीय कंपनियों आईबीएम और कॉम्पेक को हटाकर काम सीधे स्थानीय कंपनी डिजिटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को दे दिया गया।
जिम्मेदार अधिकारियों के पास डाटा से छेड़छाड़ की आरोपी कंपनी डिजिटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को सर्वर का रखरखाव करने का काम क्यों दिया गया, इसका जवाब नहीं है।
तीन साल पहले तक आईबीएम के पास यह काम था। आईबीएम ने पांच साल तक एलडीए के सर्वर और इस पर मौजूद डाटा की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाई।
इससे पहले सर्वर व डाटा की सुरक्षा की जिम्मेदारी कॉम्पेक कंपनी के पास थी। यह आईबीएम से तीन साल पहले से एलडीए के लिए काम कर रही थी।
इन दोनों कंपनियों की तुलना में डिजिटेक बहुत कम अनुभवी थी। इसके बाद भी इसे चुन लिया जाना खुद तत्कालीन अधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
एलडीए के जिम्मेदार अधिकारियों का तर्क है कि कंपनी के चुनाव की प्रक्रिया यूपी लीजिंग कॉरपोरेशन (यूपीएलसी) करता है। एलडीए सेवाप्रदाता कंपनी के चुनाव के लिए यूपीएलसी से ही प्रक्रिया कराता है। वहीं से कंपनी को चुनकर भेजा गया। कम अनुभवी कंपनी की सेवाएं लेने के लिए स्वीकृति एलडीए अधिकारियों ने क्यों दे दी? यह भी एक बड़ा सवाल है। क्योंकि एलडीए अधिकारी इस कंपनी को मना कर नई कंपनी का चुनाव करने के लिए भी कह सकते थे।
पांच साल बाद अपडेट कराना था सॉफ्टवेयर
एलडीए का सॉफ्टवेयर 2011 में बना। इसके बाद से इसे कभी अपडेट नहीं किया गया जबकि पांच साल बाद इसे अपडेट किया जाना था। अब साइबर जांच में सामने आया है कि ये सॉफ्टवेयर उस आईपी को सुरक्षित ही नहीं करता है जिससे डाटा में बदलाव किया गया हो। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आईपी सुरक्षित की जाती तो आसानी से उस कंप्यूटर व इंटरनेट कनेक्शन का पता लग सकता था, जहां से डाटा बदला गया था। यह डाटा में फर्जीवाड़ा करने वाले को पकड़ने में मदद करता।
कंप्यूटर डाटा कर रहे सुरक्षित
वीसी अभिषेक प्रकाश ने बताया कि डिजिटेक के खिलाफ एफआईआर हो गई है। कोशिश है कि पूर्व की तरह किसी अच्छी कंपनी से कंप्यूटर डाटा को सुरक्षित बनवाया जाए। एनआईसी की सेवाएं भी ले रहे हैं। सॉफ्टवेयर में भी जरूरी बदलाव कर इसे पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाएगा।