यूपी में सत्ता परिवर्तन होते ही एलडीए ने अपना चोला भी बदल डाला। अफसरों को अपनी गर्दन फंसती दिखी तो उन्होंने शनिवार को पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति का अवैध निर्माण सील कर दिया। जबकि नक्शा खारिज होने के बावजूद अभी तक एलडीए अफसर पूर्व मंत्री के खिलाफ कार्रवाई से बचते रहे थे।
शनिवार को प्रवर्तन दस्ते ने पूर्व मंत्री समेत कई अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की। गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले ही नटवर गोयल की पत्नी के अवैध निर्माण बीसीसी टॉवर को भी सील किया था।
पहले एलडीए के अफसर पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पर खूब मेहरबान रहे। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रुचिखंड-1, शारदानगर योजना में खसरा संख्या 174 की जगह पर पूर्व मंत्री ने आवास और बेसमेंट में एक गोदाम का जो नक्शा एलडीए में जमा किया था, वह ही गलत था। निर्माण को सलेहनगर तिराहा की कॉर्नर की जमीन पर दिखाया गया।
इसके उलट जब रेवेन्यू रिकॉर्ड के नक्शे में खसरा संख्या 174 की जगह पता की गई तो यह भूखंड रूचिखंड में अंदर की जगह पर मिला। ऐसे में पास होने के लिए आया नक्शा ही गलत पाया गया।
रिकॉर्ड गलत होने के बावजूद भी इसे नहीं किया खारिज
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इसके बाद भी मानचित्र सेल ने एनओसी की फाइल आगे बढ़ाते हुए अर्जन और नियोजन विभाग में भेज दिया। मार्च 2015 में आवेदन के बाद भी यह फाइल नियोजन विभाग, अर्जन और मानचित्र सेल के बीच चलती रही। रिकॉर्ड गलत होने के बाद भी अफसरों ने इसे खारिज करना मुनासिब नहीं समझा। जबकि सपा सरकार जाते ही बाद नक्शा खारिज किया गया।
बिना नक्शा तीन मंजिला निर्माण
खुलेआम बिना नक्शा पास कराए मंत्री ने तीन मंजिला अवैध निर्माण इस बीच करा दिया। वहीं एलडीए इस अवैध निर्माण को सील करने से अब तक बचता आ रहा था। एलडीए के खुद के रिकॉर्ड के मुताबिक, 17 मार्च को अपर सचिव सीमा सिंह ने एक आदेश जारी किया।
इसमें निर्माण की अनुमति के लिए जमा गायत्री प्रजापति केआवेदन और नक्शा को निरस्त कर दिया गया। इसमें साफ तौर पर प्रवर्तन सिस गोमती को भी कार्रवाई करने के लिए आदेश भी जारी हुए।
इसके बाद भी अवैध निर्माण लगातार होता रहा, लेकिन अधिकारियों ने बिल्डिंग को सील कराना तक जरूरी नहीं समझा। इसके उलट मंत्री को शमन मानचित्र दाखिल करने का मौका एलडीए की ओर दिया गया।
इन पर भी हुई कार्रवाई
एलडीए के प्रवर्तन दस्ते ने शनिवार को पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति सहित आधा दर्जन निर्माण सील किए।
इनमें गायत्री प्रजापति व अन्य का सालेह नगर बिजनौर रोड पर आशियाना में भूखंड संख्या 589/1 का निर्माण, नादान महल रोड पर केके गुप्ता का निर्माण, सेनानी विहार मेन गेट के पास एसपी मिश्रा व आरके तिवारी का निर्माण, औरंगाबाद जागीर में शहीद पथ के पास कृपाल सिंह का निर्माण, विराज खंड गोमती नगर में अवनींद्र कुमार सिंह का निर्माण और खरगापुर में घनश्याम यादव का निर्माण शामिल है।
एलडीए के जनसम्पर्क अधिकारी अशोक पाल सिंह ने बताया कि अवैध निर्माण को सील कर पुलिस अभिरक्षा में क्षेत्रीय थानों को सौंप दिया गया।
ग्रामीणों से खरीदी आबादी की जमीन
मंत्री का कॉमर्शियल निर्माण जिस जगह खसरा संख्या 174 पर किया जा रहा है। वह खसरा जिला प्रशासन के रेवेन्यू रिकॉर्ड में ग्रामसभा की आबादी वाली जमीन है। इसकी वजह से इस जमीन को शारदानगर योजना में अधिग्रहित ही नहीं किया गया था। इसका लैंडयूज भी आवासीय है।
ऐसे में अगर कोई ग्रामीणों से जमीन खरीद भी लेता है, इसके बाद भी वहां कॉमर्शियल उपयोग नहीं किया जा सकता है। हालांकि, खसरा संख्या 174 के कॉर्नर भूखंड होने पर पहले ही विवाद बना हुआ है।
तोड़ा गया पीसीएस अधिकारी का अतिक्रमण
गोमती नगर विस्तार स्थित राप्ती अपार्टमेंट में फ्लैट संख्या 802 के आवंटी एक पीसीएस अधिकारी ने गैलैरी में ग्रिल लगाकर कब्जा कर लिया था। इसकी शिकायत फ्लैट संख्या 801 में रहने वाले एक सेवानिवृत्त रिटायर्ड अधिकारी ने की।
इसके बाद एलडीए की टीम ने शनिवार को यहां पर किए गए अवैध ग्रिल गैस कटर से काटकर हटा दिया। कब्जे को लेकर एलडीए अधिकारियों पर दोनों ओर से दबाव था। एक पक्ष कब्जा हटवाने के लिए दबाव डाल रहा था तो दूसरा उसे बचाने के लिए।