एलडीए के लिए बसंतकुंज योजना में वर्षों से विवादित 132 एकड़ नजूल लैंड हासिल करने का रास्ता साफ हो गया है।
इसी के साथ इस योजना के करीब 1200 आवंटियों को प्लॉट पर कब्जा मिलने की उम्मीद जगी है।
यहां मेट्रो के मदर डिपो व स्टेशन की भूमि भी अब बचाई जा सकेगी। प्रस्ताव तैयार है,जिसे बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।
दरअसल नजूल होने के नाते प्राधिकरण जमीन का कोई भी मुआवजा नहीं देना चाहता था। मगर इस भूमि पर करीब 100 साल से किसान काबिज रहे हैं, जो बिना मुआवजे के हटने को राजी नहीं थे।
इस वजह से बसंतकुंज योजना बुरी तरह से प्रभावित हो रही थी। अब प्राधिकरण मुआवजे को राजी हो रहा है। दरअसल मेट्रो डिपो व स्टेशन की जमीन आने से इस भूमि को लेकर एलडीए पर भारी दबाव था।
किसानों के साथ हुए समझौते के बाद दिसंबर से योजना का काम शुरू हो सकता है। वर्ष 2003 में इस स्कीम का पंजीकरण हुआ था।
यहां ही बनना है दूसरे फेज का मेट्रो डिपो
बसंतकुंज में मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (चारबाग से बसंतकुंज) के लिए मदर डिपो बसंतकुंज में ही बनाया जाएगा। ऐसे में नजूल भूमि का यह विवाद उस दृष्टि से भी निपटाया जाना बहुत जरूरी था।
यहां बिल्डर काबिज होकर प्लाटिंग करने लगे हैं। किसानों को मुआवजा मिलने के बाद बिल्डर को एलडीए यहां से बेदखल कर देगा।