प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप बड़ी संख्या में लोगों को सूबे का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘यश भारती’ देने के लिए संस्कृति विभाग को कर्ज लेना पड़ा। इस सम्मान के तहत प्रत्येक व्यक्ति को 11 लाख रुपये नकद दिए जाते हैं।
संस्कृति विभाग को चालू वित्तीय वर्ष में यश भारती के मद में साढ़े तीन करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इस रकम से केवल 33 लोगों को यश भारती सम्मान दिया जा सकता था, लेकिन विभाग को 78 लोगों को सम्मानस्वरूप आठ करोड़ 58 लाख रुपये देने पड़े। ऐसे में विभाग को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) से पांच करोड़ का कर्ज लेना पड़ा।
गत 27 अक्तूबर को आयोजित समारोह की पूर्व संध्या ही नहीं, मंच पर भी यश भारती पाने वालों के नाम शामिल किए गए और यह संख्या 74 तक पहुंच गई। ऐसी नौबत आ गई थी कि विभाग के पास इन्हें देने के लिए केवल शॉल या पुष्पगुच्छ ही बचा था। किसी-किसी को तो शॉल भी नहीं मिला।
एलडीए से पांच करोड़ रुपये लिए उधार
यश भारती सम्मान
- फोटो : amar ujala
आखिरी समय में सूची में शामिल किए गए और कुछ अनुपस्थित रहे लोगों के लिए जब एक दिसंबर को समारोह हुआ तो चार और नए नाम जुड़ गए। इससे चालू वित्तीय वर्ष में यश भारती पाने वालों की संख्या बढ़कर 78 हो गई।
हालांकि विभाग ने इसी वर्ष 21 मार्च को आयोजित समारोह में भी 46 लोगों को यश भारती दिया था, लेकिन इसकी रकम पिछले वित्तीय वर्ष के बजट से खर्च हुई थी।
शासन की ओर से आवंटित किया गया बजट कम था। इस वजह से हमें लखनऊ विकास प्राधिकरण से कर्ज लेना पड़ा है। - हरिओम, सचिव, संस्कृति
शासन के निर्देश पर हमने संस्कृति विभाग को पांच करोड़ रुपये कर्ज दिया है। बजट मिलने पर हमें यह राशि लौटाई जाएगी।- हरेकृष्ण यादव, वित्त नियंत्रक, एलडीए