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रवायत बन गई एलडीए की जनता अदालत

Fri, 22 Nov 2013 08:54 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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उपाध्यक्ष और सचिव की गैर मौजूदगी में बृहस्पतिवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण की जनता अदालत एक रवायती आयोजन बन कर रह गई।
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बिना उचित प्रचार-प्रसार के गुपचुप जनता अदालत लगाई गई । अपर सचिव सीमा सिंह की अध्यक्षता में 21 प्रकरणों की सुनवाई की गई।

इनमें से रिफंड संबंधित चार मामलों का मौके पर निस्तारण कर दिया गया। जबकि, बाकी 17 प्रकरणों को निस्तारण के लिए अधिकारियों को प्रेषित कर दिया गया।
जनता अदालत शासन के आदेश पर शुरू की गई थी। प्रत्येक माह के अंतिम या फिर उससे पहले के बृहस्पतिवार को जनता अदालत आयोजित की जाती है।

पहली दो अदालतों के बाद इसके आयोजन में प्राधिकरण की शिथिलता बढ़ती जा रही है। हद यह है कि पिछले माह (अक्तूबर) में तो जनता अदालत का आयोजन ही नहीं किया गया था।

इस बार किया गया तो न ही उपाध्यक्ष लखनऊ में हैं और न सचिव। जनता अदालत की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए मात्र एक विज्ञापन प्रकाशित करा के इतिश्री कर ली गई।
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मात्र 21 लोग अपनी समस्या लेकर आए। अपर सचिव सीमा सिंह ने बताया कि, चार समस्याओं का निस्तारण मौके पर कर दिया गया। समस्याओं में 4 रिफंड की, 17 एप्लीकेशन अन्य थी।
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जिनमें ट्रस्ट की संपत्तियों से जुड़ी तीन, आश्रयहीन की 6, अतिक्रमण की एक और कुछ अन्य शिकायतें सुनी गईं। इन सभी शिकायतों का निस्तारण अगले एक महीने के भीतर करने का दावा किया गया है।
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