लखनऊ में लैप्स होने की कगार पर खड़ी एलडीए की मोहान रोड आवासीय योजना को बचाने की कवायद ने तेजी पकड़ी है। इससे निपटने के लिए एलडीए किसानों को मुआवजा देने के लिए जिला प्रशासन को कहा है।
इसके लिए जिला प्रशासन ने एलडीए से 30 करोड़ रुपये की डिमांड की है,जिससे किसानों को समझौते के आधार पर मुआवजा दिया जा सके।
मोहान रोड आवासीय योजना के लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया खासी धीमी होती नजर आ रही है। यहां धारा-4 और 6 तामील की जा चुकी है। प्यारेपुर और कलियाखेड़ा गांव के किसानों को इस आशय के नोटिस भेजे जा चुके हैं।
यहां करीब 1600 किसानों की जमीन एलडीए लेगा। इसके लिए उनसे समझौता कर अपना मुआवजा तय कराने की अपील जिला प्रशासन और एलडीए कर रहा है।
दिसंबर 2015 तक एलडीए को पूरी करनी है योजना
सबकुछ दिसंबर-2013 में तय हो गया था। मुआवजा तय कर किसानों को वितरण शुरू किया जाना था,मगर पहले तो एक जनवरी-2014 को देश में लागू किए गए भूमि अर्जन कानून के तहत प्रदेश सरकार की पॉलिसी न बनने से मुआवजा नहीं तय हो पा रहा था।
इसके बाद अब किसानों का सर्वे पूरा न हो पाने से इस योजना के लैप्स होने की आशंका पैदा हो गई। इस योजना के लिए डेडलाइन दिसंबर-2015 है। मगर अगले कुछ महीने में मुआवजे का मसला फाइनल नहीं हो सका तो योजना का लैप्स होना तय है।
एलडीए के एक अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से 30 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा मांगे गए हैं।
668 एकड़ भूमि में करीब 25 फीसदी भूमि का इस्तेमाल रिहायशी लैंडयूज के लिए किया जाएगा। बाकी भूमि करक्रिएशनल,कॉमर्शियल,सड़क,सामुदायिक,ग्रीन बेल्ट और संस्थागत आदि के लिए इस्तेमाल होगी।
करीब 25 प्रतिशत भूमि का उपयोग ग्रुप हाउसिंग बनाने के लिए एलडीए करेगा। इसमें कम से कम 40 हजार परिवारों को बसाया जा सकेगा। यह अभी केवल एलडीए का एक अनुमान है। मुआवजा होने के बाद इस भूमि की प्लानिंग शुरू करवाई जाएगी।