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बड़ी खबरः अब किराएदार भी बन सकेंगे मकान मालिक

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एलडीए के मकानों में किराए पर रहने वालों का अपने आशियाने का सपना जल्द पूरा होगा। जी हां, एलडीए ने अपने किरायेदारों को अब मकान मालिक बनने का मौका दिया है। एलडीए की विभिन्न योजनाओं में ऐसे करीब 2000 किरायेदार हैं।
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इन्हें अब रजिस्ट्री और फ्री होल्ड की सुविधा एलडीए ने दे दी है। इसके बाद अब किरायेदार अपनी संपत्ति का प्राधिकरण में म्यूटेशन कराने के बाद रजिस्ट्री और फ्री होल्ड करा सकते हैं।

हालांकि, कुछ कॉमन एरिया वाले दोमंजिला आवासों की केवल लीज डीड ही होगी। वहीं, संपत्ति अपने नाम कराने के लिए सर्किल रेट के 50 फीसदी धन जमा करने और 12 फीसदी फ्री होल्ड चार्ज देना होगा।
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एलडीए की राम नगर, मोतीझील, पेपर मिल कॉलोनी, ऐशबाग, बाजारखाला, महानगर, निराला नगर, अलीगंज समेत अन्य कॉलोनियों में लगभग 2000 रेंट की संपत्तियां हैं। इनके मालिक नाम मात्र का किराया देकर इन भवनों में रह रहे हैं। मगर, उनको संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं है।

वहीं, इनको खाली करवा पाना भी एलडीए के लिए लगभग नामुमकिन है। ऐसे में भवनों की खरीद-फरोख्त को सुलभ करने और लोगों को एलडीए के चक्कर काटने से बचाने के लिए किराये के भवनों को अब आवंटी या उसके उत्तराधिकारी के नाम स्थाई रूप से करने का फैसला हो चुका है। इस संबंध में फाइलों का अनुमोदन भी शुरू हो गया है।

पूरी प्रक्रिया के बाद होगा अनुमोदन

प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि, रेंट की संपत्तियों में सबसे पहले आवंटी को वह भवन की रजिस्ट्री के लिए आवेदन करना होगा। जरूरी कागजातों को जमा करने के बाद उसके नाम पर प्राधिकरण के संपत्ति अधिकारी के साथ रजिस्ट्री और फ्री होल्ड होगा।

अपना किराएदार होने के कारण एलडीए आवंटी को सर्किल रेट में 50 फीसदी की छूट देता है। हालांकि, रजिस्ट्री विभाग उससे पूरे सर्किल रेट के हिसाब से ही स्टांप ड्यूटी लेगा। रजिस्ट्री और फ्री होल्ड होने के बाद संपत्ति पर पूरा स्वामित्व आवंटी का होगा।

आवंटी जीवित नहीं तो बदलेगी प्रक्रिया

अगर आवंटी जीवित नहीं है तब प्रक्रिया बदल जाएगी। पहले तो आवंटी के उत्तराधिकारी के पक्ष में नामांतरण की कार्रवाई होगी। इसमें सारे उत्तराधिकारियों को एक पक्ष में हलफनामा देना होगा। इसके बाद इसकी सूचना प्रकाशित कर एक माह में लोगों से आपत्तियां मांगी जाएंगी। आपत्तियां न आने की दशा में पहले नामांतरण होगा और इसके बाद एलडीए नए आवंटी के नाम पर रजिस्ट्री और फ्री होल्ड कर देगा।
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सच होगा अपने घर का सपना

लखनऊ विकास प्राधिकरण में नजूल का फ्री होल्ड वर्तमान दर पर ही होगा। पहले ये मूल रेंट के आधार पर ही होता था, लेकिन अब ये बदल गया है। अब प्रीमियम पट्टों के मामले में 15 फीसदी और सामान्य पट्टों में 40 फीसदी डीएम सर्किल रेट के हिसाब से फ्री होल्ड देय है।

हालांकि, इससे यह करीब ढाई से तीन गुना तक महंगा हो जाएगा। इसके अलावा रेंट की प्रॉपर्टी में डीएम सर्किल रेट का 50 फीसदी जमा करने पर फ्री होल्ड होकर वैध कब्जेदार भूमि के मालिक बन सकेंगे। पहले नजूल लैंड के वैध पट्टेदार मूल लीज रेंट के आधार पर बढ़ते ब्याज के क्रम में बनी नई कीमत का 12 फीसदी जमा कर जमीन के मालिक बन जाते थे।

मतलब उनका फ्री होल्ड हो जाता था। मगर, अब ये वर्तमान दर से लिया जा रहा है। प्राधिकरण के एक अधिकारी के मुताबिक, ये अब डीएम सर्किल रेट का 15 फीसदी प्रीमियम पट्टों पर और 40 फीसदी नॉन प्रीमियम पट्टों पर लिया जाएगा।
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