एलडीए अपनी आवासीय योजनाओं में कम आवेदन आने पर आवेदकों को ही धोखा देना शुरू कर दिया। आवेदकों के बीच बिना लॉटरी निकाले ही कुछ समय बाद रजिस्ट्रेशन की तारीख बढ़ा देता है। इससे पहले आवेदन करने वाले लोगों को न केवल अपने फ्लैट मिलने में देरी हो रही है, बल्कि प्रतिस्पर्धा भी बढ़ती जा रही है।
हाल में गोमती नगर विस्तार सेक्टर-1 में सरयू अपाटर्मेंट और देवपुर पारा की स्कीम में आवेदकों के साथ इसी तरह का खेल खेला जा रहा है। एलडीए के फ्लैटों को लेकर लोगों में अधिक रुचि न होने से फ्लैटों की संख्या की तुलना में आवेदन नहीं आ पाते हैं।
ऐसे में एलडीए नियमों की अनदेखी कर उनका पंजीकरण दोबारा शुरू करता जा रहा है। पिछले दो साल में ये कई बार हुआ है। जबकि एलडीए हर फ्लैट की कुल कीमत में से पांच फीसदी बतौर पंजीकरण राशि जमा करता है। इससे करोड़ों रुपये एलडीए के एकाउंट में पहुंचते हैं। बैंक से अच्छा खासा ब्याज भी मिल जाता है। इसके बावजूद आवेदनकर्ता को धोखा ही मिलता है।