हमारे दिमाग तक सूचनाएं कई जटिल कोड की शक्ल में पहुंचती हैं। इन कोडों को स्थाई स्मृति में संग्रहित करने के लिए दिमाग को जटिल गणनाओं से गुजरना होता है। लेकिन इस प्रक्रिया में बहुत सारी सूचनाएं संग्रह नहीं हो पाती और हम चीजों को याद करने पर भी रिकॉल नहीं कर पाते।
ये बातें लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करा चुके मेमोरी गुरू वीरेंद्र मेहता ने मंगलवार को एमिटी विश्वविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय मेमोरी एनहान्समेंट कार्यशाला में कहीं।
एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ बिहेवियरल एंड एप्लाईड साइंस की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में उन्होंने कहा कि यदि इन सूचनाओं को सरलीकृत किया जा सके तो याद रखने में परेशानी नहीं होगी।