हजारों लोग और आशियाना छोड़कर जाने का गम। हर तरफ चेहरे पर मायूसी। मानो रात भर सो नहीं पाए हों। बृहस्पतिवार सुबह जिला प्रशासन, एलडीए, नगर निगम और पुलिस विभाग के अफसर बुलडोजर लेकर अकबरनगर पहुंचे तो लोग घरों से बाहर निकल आए। घरों की महिलाएं बिलखने लगीं और बोझिल मन से सामान समेटने में लग गईं। दोपहर बाद बस्ती को हाईकोर्ट का फैसला आया। इसकी जानकारी स्थानीय लोगों सहित महिलाओं को हुई तो मायूसी दूर हुई और इस बार खुशी से उनकी आंखें छलक पड़ीं।
अकबरनगर में सुबह से ही स्थानीय व्यापारी दुकानों के बाहर डटे थे। दुकानों के कर्मचारी भी मौजूद थे। प्रशासन ने सामान हटाने का दबाव बनाया, जिसके बाद दुकानें खुलने लगीं। यही नहीं बस्तियों से भी लोग सामान निकालने लगे। बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ अकबरनगर में जुटी रही। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस, पीएसी बल और सीआरपीएफ के जवान तैनात किए गए थे। पुलिस ने अकबरनगर के दोनों तरफ फैजाबाद रोड पर बैरिकेडिंग लगा दी और यातायात डायवर्ट कर दिया। अचानक से मुख्य मार्ग बंद करने से वाहनों की लंबी कतार लग गई। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने वाहनों को बंधे वाली सड़क की ओर मोड़ दिया। इसके बाद जाम खुलवाया।
अधिवक्ता ने सुनाया हाईकोर्ट का आदेश तो बजने लगे ढोल
हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी लेकर अधिवक्ता अकबरनगर पहुंचे। उन्होंने लोगों को बताया कि चार सप्ताह तक कार्रवाई पर रोक लग गई है और 22 जनवरी को अगली सुनवाई होगी। आदेश की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। यही नहीं, बड़ी संख्या में लोग घरों से निकलकर कॉलोनी की गली में एकत्र हो गए। लोगों ने हाथ में तिरंगा लेकर मुख्य मार्ग पर निकलने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस बल की सख्ती के कारण ये मुख्य मार्ग पर नहीं आ सके। कॉलोनी के भीतर लोगों ने पटाखे भी फोड़े। यही नहीं, ढोल नगाड़े बजाकर हाईकोर्ट के फैसले पर खुशी जताई।
भीड़ को खदेड़ा, कायम रही शांति व्यवस्था
इलाके में पूरे दिन सुरक्षा बल सक्रिय नजर आया। स्थानीय अभिसूचना इकाई भी अलर्ट रही। बीच-बीच में लोग मुख्य मार्ग पर इकट्ठा हुए, जिन्हें सुरक्षाकर्मियों ने खदेड़ दिया। एलडीए वीसी इंद्रमणि त्रिपाठी माइक पर एनाउंस करते दिखे। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। उधर, डीसीपी मध्य अपर्णा रजत कौशिक, एडीसीपी पूर्वी अली अब्बास व एडीएम वित्त-राजस्व राकेश कुमार सिंह ने व्यापारियों से बात कर दुकानों से सामान निकालने के लिए कहा, ताकि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सके। हालांकि, हाईकोर्ट के फैसले के बाद अमला वापस लौट गया।