हाउस टैक्स निकायों के आय का मुख्य स्रोत भले ही हो पर इसकी वसूली काफी धीमी गति से चल रही है। प्रदेश के 75 निकाय ऐसे हैं जहां हाउस टैक्स की वसूली काफी खराब है।
स्थानीय निकाय निदेशालय बार-बार इनसे वसूली की सूचना मांग रहा है, लेकिन ये देने को तैयार नहीं है।
स्थानीय निकाय निदेशक नरेंद्र कुमार सिंह ने इस संबंध में इनके अधिशासी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शीघ्र ही हाउस टैक्स की वसूली की सूचना निदेशालय को दी जाए।
उत्तर प्रदेश में 630 निकाय हैं। निकायों का मुख्य काम लोगों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है और इसके एवज में वे हाउस टैक्स की वसूली कर सकते हैं।
नगर निगमों को छोड़ दें तो पालिका परिषद और नगर पंचायतों में हाउस टैक्स वसूली की स्थिति काफी खराब है। अध्यक्ष अपने हिसाब से हाउस टैक्स में छूट दिलाते रहते हैं। कुछ मामलों में निकाय अधिकारियों की भी लापरवाही होती है।
स्थानीय निकाय निदेशालय ने प्रदेश के सभी नगर निगम, पालिका परिषदों और नगर पंचायतों से हाउस टैक्स वसूली की सूचना मांगी थी। पर स्थिति यह है कि 75 निकाय हैं जो सूचना नहीं दे रहे हैं।
इनमें मुरादाबाद, मेरठ, सहारनपुर, बरेली, आगरा, अलीगढ़, कानपुर, झांसी, चित्रकूट धाम, इलाहाबाद, मिर्जापुर, लखनऊ, फैजाबाद, गोरखपुर, आजमगढ़ और वाराणसी मंडल के निकाय शामिल हैं।