प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा विश्वविद्यालय ‘केजीएमयू’ में डाक्टर मरीजों को थप्पड़ मारकर चलता कर रहे हैं।
अमेठी जिले के सुल्तानपुर के बहेंगी गांव की रहने वाली रजनी अपनी एक साल की बेटी राशि को केजीएमयू के गांधी वार्ड में भर्ती कराया था।
डॉक्टरों ने बच्ची के पेट में गैस की गंभीर स्थिति को देखते हुए ऑपरेशन करने की सलाह दी। परिजनों ने ऑपरेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली।
रजनी ने बताया की ऑपरेशन से पहले डॉक्टरों ने खून जमा करने की बात कही थी। आनन-फानन में बृजेश नामक परिजन ने बच्ची के ऑपरेशन के लिए एक यूनिट खून जमा कर दिया।
इसका एक तिहाई भाग डाक्टरों ने बच्ची को चढ़ा दिया बाकी बचे खून को निकालकर वापस रख लिया।
अचानक रविवार की सुबह वार्ड में आई महिला डॉक्टर ने बिना किसी बात के रजनी को दो तीन तमाचे मारकर वार्ड से धक्के मारकर बाहर कर दिया।
महिला डॉक्टर की क्रूरता यहीं नहीं रूकी। उसने रजनी से एक सादे कागज में अंगूठा लगा लिया।
बच्ची की मां उसके पिता संतोष कुमार और उसके मामा जीतबहादुर जब वार्ड में अपना सामान लेने गए तो डाक्टर ने वार्ड में घुसने से मना कर दिया और फौरन आंख से ओझल हो जाने का आदेश दे दिया।
बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए परिजन आनन-फानन में उसे हाथ और नाक में लगी ड्रिप के साथ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ‘सिविल’ अस्पताल ले आए।
सुबह करीब ग्यारह बजे परिजन जब बच्ची को अस्पताल लेकर पहुंचे तो इमरजेंसी में तैनात डाक्टरों ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया।
इसके बाद परिजन बच्ची के हाथ में लगी ड्रिप के साथ अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक के कमरे के बाहर बने मुख्य द्वार पर घंटो खड़े रहे लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था।