कलेक्ट्रेट में प्रवेश रोके जाने पर अधिवक्ताओं और सीओ के बीच होती बहस। संवाद
रायबरेली। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के पहले ही दिन पुलिस की मनमानी कार्यशैली सामने आ गई। पहली बार एसपी कार्यालय के गेट से भी वकीलों को भी कलेक्ट्रेट में प्रवेश नहीं मिला। इससे गुस्साए वकीलों ने ओवरब्रिज के पास लगे बैरियर पर जमकर हंगामा किया।
वकीलों और पुलिस कर्मियों में तीखी नोकझोंक भी हुई। वकीलों ने पुलिस पर मनमानी करने का आरोप लगाया। कहा कि यदि प्रवेश नहीं मिलना था तो एक दिन पहले ही जानकारी दे दी जाती। पहली बार कलेक्ट्रेट में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है जबकि नामांकन प्रक्रिया कलेक्ट्रेट के दूसरे गेट की तरफ हो रही है।
हर चुनाव में विकास भवन स्थित कलेक्ट्रेट के गेट की ओर से नामांकन प्रक्रिया होती थी। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के गेट से कलेक्ट्रेट में अधिकारियों, कर्मचारियों और वकीलों को प्रवेश दिया जाता था। अन्य लोग भी आ-जा सकते थे लेकिन इस बार शुरू हुई नामांकन प्रक्रिया के पहले ही दिन भले ही न भीड़ आई और न ही कोई पर्चा दाखिल हुआ लेकिन पुलिस ने पूरी तरह शिकंजा कसे रखा। ओवरब्रिज के पास लगे बैरियर से वकीलों ने कलेक्ट्रेट में प्रवेश करने का प्रयास किया लेकिन पुलिस वालों ने अंदर जाने से मना कर दिया।
तमाम प्रयास के बाद भी वकीलों को प्रवेश नहीं दिया गया। इससे गुस्साए वकीलों ने हंगामा किया। पुलिस कर्मियों के साथ तीखी नोक-झोंक भी की। कलेक्ट्रेट में प्रवेश के लिए बैरियर पर ही कई घंटे वकील खड़े रहे।
बैरियर पर तैनात पुलिस कर्मियों ने इसके लिए एसपी और डीएम से बात करने की सलाह दी। कहा कि अधिकारियों के निर्देशों का पालन किया जा रहा है। कई घंटे की गहमागहमी के बाद अधिवक्ता बैरंग लौट गए। इस बारे में अधिकारी बयान देने से बचते नजर आए।