शासन व उच्च न्यायालयों में कार्यरत विधि अधिकारियों के बीच कम्युनिकेशन गैप को दूर करने के लिए शासन ने कई कदम उठाने का फैसला किया है।
प्रदेश के सभी विधि अधिकारियों को आने वाले दिनों में इंटरनेट कनेक्शन व स्कैनर मुहैया कराए जाएंगे। शनिवार को मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने एनेक्सी स्थित अपने कार्यालय में लंबित वादों की पैरवी की समीक्षा की।
इस दौरान पता चला कि शासन के अधिकारियों व न्यायालय में कार्यरत विधि अधिकारियों के बीच कम्युनिकेशन गैप मुकदमों की समय से पैरवी में रोड़ा बनी हुई है।
बैठक में तय हुआ कि हाईकोर्ट की इलाहाबाद पीठ व लखनऊ खंडपीठ में नियुक्त सभी विधि अधिकारियों को बेहतर तालमेल के लिए स्कैनर व इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएं।
प्रदेश में करीब 800 विधि अधिकारी तैनात हैं। इसके अलावा सभी प्रमुख सचिवों, सचिवों, नोडल अधिकारियों व विधि अधिकारियों की एक संयुक्त डायरेक्ट्री तैयार की जाएगी।
इसमें इन अधिकारियों के मोबाइल व लैंडलाइन नंबर दिए जाएंगे। मुख्य सचिव ने विभागों की ओर से वादों की पैरवी के लिए न्यायालयों में तैनात किए जाने वाले समन्वय अधिकारियों के बाबत जानकारी ली।
बैठक में प्रमुख सचिव न्याय एसके पांडेय सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।