मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात कही, लेकिन पुलिस के जिन अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, उनके प्रति आला अफसरों का रवैया ढुलमुल रहा। बाराबंकी के पुलिस कप्तान पर थाना बेचने का आरोप लगा। जांच डीआईजी फैजाबाद से कराई गई।
हालांकि, आरोप लगाने वाला सिपाही न सिर्फ अपने आरोपों से पलट गया, बल्कि उस व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज करा दिया जिसने उसका वीडियो वायरल किया था। इसी तरह, बांदा में अवैध खनन व अवैध परिवहन के आरोपों की जांच करने पहुंचे दो आईपीएस अधिकारियों के साथ हाथापाई तक की नौबत आ गई। पुलिस इस मामले में मारपीट की घटना से इनकार करती रही। हालांकि भ्रष्टाचार के छोटे-मोटे मामले में सिपाही को सस्पेंड करने और फिर बर्खास्त करने में पुलिस के आला अफसरों ने कोई देर नहीं की।
कोई बड़ा दंगा नहीं... लेकिन सहारनपुर और कासगंज ने लगा दिया दाग
यूपी में पिछले एक साल में कोई बड़ा दंगा तो नहीं हुआ, लेकिन सहारनपुर व कासगंज में जातीय व सांप्रदायिक संघर्ष का दाग लगा गया। गणतंत्र दिवस पर कासगंज में तिरंगा यात्रा के दौरान हुई हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हुई तो बवाल बढ़ गया।
राजधानी से एक आईपीएस अधिकारी को कासगंज में कैंप करने के लिए भेजना पड़ा। इस हिंसा पर सोशल मीडिया में लंबी बहस भी चली। सहारनपुर में जातीय हिंसा भी सरकार की किरकिरी की वजह बनी। यहां भाजपा के सांसद पर ही आरोप लगा कि उन्होंने पुलिस अधिकारी के घर में घुस कर तोड़फोड़ कराई।
3140 बदमाश गिरफ्तार
1999 इनामी बदमाश गिरफ्तार
332 बदमाश घायल हुए
4 पुलिसकर्मी शहीद
292 पुलिसकर्मी घायल
1339 एनकाउंटर
44 बदमाश मारे
एनकाउंटर का खौफ
डर के मारे बदमाशों ने कोर्ट में सरेंडर किए, तो अपराध न कर, मेहनत-मजदूरी करने के वादे भी किए।
सुस्त पड़ा एंटी रोमियो स्क्वॉयड
सरकार बनने के तुरंत बाद महिलाओं से संबंधित अपराध रोकने के लिए एंटी रोमियो स्क्वॉयड का गठन किया गया। कई जगह तो दोस्त, भाई-बहन तक पुलिस के निशाने पर आए। सीएम योगी को निर्देश देना पड़ा कि मर्जी से घूमने वालों को परेशान किया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी। शुरुआत में एंटी रोमियो स्क्वॉयड की धूम अधिक थी, लेकिन साल पूरा होते-होते इसकी रफ्तार सुस्त पड़ गई। इसी तरह एंटी भूमाफिया स्क्वॉयड भी बड़े भू-माफिया पर कार्रवाई करती नजर नहीं आई।