आवाज भारी हो रही है और गले में सूजन भी है, ऐसे में डॉक्टर के पास जाना ही एक रास्ता होता है। लेकिन अब थायरायड संबंधी ऐसी ही बीमारियों के बारे में जानना एक क्लिक पर ही संभव हो गया है।
एसजीपीजीआई के इंडोक्राइन सर्जरी विभाग की वेबसाइट www.sgpgi.edu.in/endosurgery/e-learningcenter
पर ऐसी ही बीमारियों का समाधान मिलेगा।
हिंदी और अंग्रेजी भाषा की इस वेबसाइट को इंडोक्राइन सर्जरी विभाग ने रविवार को अपने 26वें स्थापना दिवस पर लॉन्च किया। यह जानकारी टेलीमेडिसिन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में इंडोक्राइन सर्जरी विभाग के हेड प्रो. एसके मिश्र ने दी।
इस ई-लर्निंग पोर्टल के दो हिस्से हैं। इनमें से एक आम आदमी के लिए है। जो थायरायड, ब्रेस्ट कैंसर, थायरायड कैंसर, हड्डियों के कमजोर होने की बीमारी पैराथायरायड कैंसर जैसी बीमारियों, उनके लक्षणों और इलाज की जानकारी देगा।
मरीज इलाज के लिए कहां जाएं, बीमारी की सर्जरी के लिए गाइडलाइंस क्या हैं, इलाज के बाद फॉलोअप कैसे हो। मरीजों के पूछे गए सवालों के जवाब भी विशेषज्ञ इस पोर्टल के माध्यम से देंगे।
वेबसाइट का दूसरा हिस्सा मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए होगा। जिसे विशेष पासवर्ड से ही इस्तेमाल जा सकेगा। प्रो. मिश्रा ने बताया कि इस तरह की वेबसाइट पहली बार देश में शुरू की जा रही है।
इंडोक्राइन सर्जरी विभाग स्थापना दिवस के मौके पर www.essence.net.in (इंडोक्राइन सर्जरी स्किल इम्पॉवरमेंट
नेटवर्किंग सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस) पोर्टल भी लॉन्च करेगा।
इसका मकसद इंडोक्राइन सर्जरी से जुड़े सभी चिकित्सा संस्थानों को एक वर्चुअल प्लेटफार्म उपलब्ध कराना है। इसमें ऐसे इंडोक्राइन सर्जन को जोड़ा जाएगा जिनमें ऐसे जरूरतमंद सर्जन कोे इस विधा को सिखाने का जुनून हो।
कम संसाधनों से वो इस ई-लर्निंग पोर्टल से सुरक्षित और सटीक सर्जरी करने की जानकारी दे सके। प्रो. एसके मिश्रा ने बताया कि इस पोर्टल में सूचना प्रौद्योगिकी, वेब टूल्स, वर्चुअल रियलिटी को सुविधा के अनुसार इस्तेमाल किया जाएगा।
विभाग ने अपने एल्यूमिनाई को जोड़ने के लिए www.sesan.in (एसजीपीजीआई इंडोक्राइन सर्जरी एलुमनाई नेटवर्क) पोर्टल भी लॉन्च किया।
प्रो. एसके मिश्रा ने बताया कि विभाग के 30 से अधिक छात्र-छात्राएं देश भर के चिकित्सा संस्थानों में कार्य कर रहे हैं। ये एसजीपीजीआई की बौद्धिक संपदा हैं। इनके सहयोग से देश भर में फैले इन सर्जन को एक साथ लाया जाएगा।