समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राजधानी लखनऊ में घंटाघर पर महिलाओं के धरने के समर्थन में बैठी समाजवादी छात्र सभा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पूजा शुक्ला की गिरफ्तारी व यातना देने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इटावा में प्रदर्शनकारी महिलाओं पर लाठीचार्ज की आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा के विपरीत बताया है। कहा कि महिलाओं के प्रदर्शन से घबराई सरकार विरोध की आवाज को दबा रही है।
अखिलेश यादव ने रविवार को बयान में कहा कि संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं शांति पूर्ण धरना-प्रदर्शन पर रोक नहीं है। महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिए गए है। नागरिकता संसोधित कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्ट्रेशन (एनआरसी), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के विरोध में महिलाएं, बच्चे प्रदेश में कई स्थानों पर धरने दे रहे हैं। लखनऊ में उनके समर्थन में धरने बैठे पूजा शुक्ला को पुलिस ने अपमानित किया और गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। महिलाओं के प्रदर्शन से घबराई भाजपा सरकार उन पर धरना खत्म करने का दबाव बनाने में लगी है। लखनऊ में घंटाघर पार्क में बैठी महिलाओं के साथ ही राहगीरों से भी पुलिस अभद्रता कर रही है।
पुलिस का यह रवैया समझ से परे है क्योंकि धरना लगातार शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है। धरना स्थल पर धारा 144 लगाने का कोई औचित्य नही है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा है कि धारा 144 अनावश्यक तौर पर लागू करना नागरिक स्वतंत्रता पर प्रहार है। विरोधी आवाज को कुचलने का कोई भी प्रयास विधि सम्मत नहीं हो सकता है। घंटाघर पर न तो हिंसा हो रही थी और न ही सार्वजनिक सुरक्षा पर खतरे की आशंका थी।
महिलाओं, बच्चियों के लिए सुरक्षित नहीं यूपी
सपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार में लगातार महिलाओं का अपमान होता रहा है। हर क्षण उनकी सुरक्षा व सम्मान खतरे में रहता है। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के आंकड़ों में भी यूपी महिलाओं और बच्चियों के लिए बहुत असुरक्षित स्थान है। विदेशी पर्यटकों तक को यहां अवांछित तत्वों का शिकार होना पड़ता है। उत्तर प्रदेश में मुखिया विहीन सरकार चल रही है। कहीं कानून का राज नहीं दिखाई देता है। क्या यही लोकतांत्रिक व्यवस्था है?