किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ट्रॉमा सेंटर में प्रदेश की सबसे बड़ी वेंटीलेटर यूनिट बनेगी। यूनिट के विस्तार के लिए संस्थान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की मदद लेगा।
इसके लिए केजीएमयू प्रशासन ने एनएचएम को 21 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा है। इस बजट से 60 बड़े और 20 शिशुओं के वेंटीलेटर की खरीद की जाएगी। इसके अलावा 17 वेंटीलेटर अन्य विभागों के लिए मांगे गए हैं।
यूनिट के लिए जरूरी स्टाफ का तैनाती भी इसी बजट से की जाएगी। केजीएमयू में वेंटीलेटर की आस में आने वाले मरीजों को लौटना नहीं पड़ेगा। वहां की वेंटीलेटर यूनिट के विस्तार की तैयारी की जा रही है।
एनएचएम ने ट्रामा में वेंटीलेटर यूनिट के विस्तार और उसके संचालन में मदद को हरी झंडी दे दी है। वहां से हरी झंडी मिलते ही केजीएमयू प्रशासन ने ट्र्रॉमा के वेंटीलेटर यूनिट विस्तार का प्रस्ताव तैयार कर एनएचएम को सौंप दिया है।
इस प्रस्ताव में 12 करोड़ रुपये से ट्रॉमा सेंटर की 22 बेड की वेंटीलेटर यूनिट का विस्तार कर 60 बेड करने और 3.5 करोड़ की लागत से बाल रोग विभाग में 20 बेड की नियोनेटल वेंटीलेटर यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव है।
नियोनेटल वेंटीलेटर यूनिट में 10 वेंटीलेटर के साथ ही दो बिलरुबिन एनालाइजर व छह पल्स ऑक्सीमीटर भी प्रस्ताव में मांगा गया है।
पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) व हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) को अत्याधुनिक बनाने के लिए भी एक करोड़ रुपये की मांग की गई है।
केजीएमयू प्रशासन के अनुसार इस पूरी यूनिट के संचालन के लिए मानव संसाधन और लगाए जाने वाले उपकरणों के रखरखाव के लिए जरूरी बजट भी एनएचएम से लिया जाएगा, जिससे उसके संचालन में कोई रुकावट न आए।
गौरतलब है कि संजय गांधी पीजीआई, डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज व किसी भी सरकारी अस्पताल में गंभीर मरीजों के लिए वेंटीलेटर की व्यवस्था नहीं है।
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में 22 वेंटीलेटर हैं लेकिन इनमें से काम सिर्फ 15 ही करते हैं। पीजीआई और लोहिया इंस्टीट्यूट में तो ट्रॉमा सेंटर ही नहीं है इसके चलते वहां वेंटीलेटर यूनिट भी नहीं है।