एलडीए में भूखंड समायोजन के नाम पर जमकर फर्जीवाड़ा किया गया। इसमें एलडीए के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कई सौ करोड़ रुपये की कमाई की। इसी मामले में एलडीए का चर्चित बाबू ओझा पकड़ा भी गया और उस पर कार्रवाई भी हुई।
ओझा की तरह और भी हैं जिन पर कार्रवाई हो सकती थी। इसे लेकर गोपनीय जांच भी चल रही थी। असल में कितने भूखंडों का समायोजन घोटाला है, यह रिपोर्ट तो अब तक बन ही नहीं पाई है, लेकिन माना जा रहा है कि गोमती नगर, जानकीपुरम व सीतापुर रोड योजना और कानपुर रोड योजना में करीब 500 भूखंडों के समायोजन में घोटाला किया गया।
इसमें छोटे प्लॉट और फ्लैट की बजाय फायदा पहुंचाने के लिए बड़े प्लॉट दिए गए। एक कर्मचारी नेता का कहना है कि भूखंड समायोजन घोटाले से करोड़ों की कमाई की गई है।
कैसे फेल हुआ एलडीए का फायर फाइटिंग सिस्टम?
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आग से बचाव के लिए एलडीए में इंतजाम तो खूब किए गए हैं, लेकिन जब आग लगी तो न फायर अलार्म बजा और न फायर फाइटिंग सिस्टम ही काम आ सका। इससे आग को समय रहते बुझाया नहीं जा सका। एलडीए में सुरक्षा को लेकर करीब आधा दर्जन गार्ड रात में तैनात किए जाते हैं, लेकिन घटना के समय दो ही गार्ड थे। खास बात यह कि रिकॉर्ड रूम के बाहर सीसीटीवी कैमरा भी नहीं है, जबकि एलडीए में ज्यादातर जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
एलडीए के वीसी पीएन सिंह का कहना है कि रिकॉर्ड रूम में आग किसी ने जानबूझकर लगाई, प्रारंभिक जांच में अभी यह सामने नहीं आया है। जांच टीम बनाई गई है। यदि उसकी रिपोर्ट में आता है कि आग जानबूझकर या किसी की गलती से लगी तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। जेएनपीएनआईसी, हुसैनाबाद और जनेश्वर मिश्र पार्क से जुड़ी फाइलों का रिकॉर्ड सुरक्षित है।