फर्जीवाड़े में शामिल गवाह का विवाद हुआ तो खुली सच्चाई
शिवरानी ने 09 मार्च, 1973 को धोखाधड़ी कर राम सागर की जगह किसी अन्य व्यक्ति को खड़ा करके उनके हिस्से की जमीन अपने नाम रजिस्ट्री करा ली थी। कुछ वर्षों बाद इस फर्जीवाड़े में शामिल एक गवाह का शिवरानी से विवाद हुआ तो उसने वर्ष 1977 में राम सागर को सच्चाई बता दी।
राम सागर ने रजिस्ट्री कार्यालय में जांच कराई तो धोखाधड़ी की पुष्टि हुई। इस पर उन्होंने 1978 में गोसाईंगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराकर न्याय की लड़ाई शुरू की। दिसंबर 2025 को न्यायालय विशेष न्यायाधीश पीसी एक्ट-2 के अपर जिला जज सत्येंद्र सिंह ने ब्रजेश वर्मा के हक में फैसला सुनाया।
वादी-प्रतिवादी दोनों की हो चुकी है मौत
ब्रजेश ने बताया कि वर्षों तक मुकदमा चला और वर्ष 2003 में पिता ने दम तोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने कानूनी लड़ाई जारी रखी। इस दौरान 2013 में शिवरानी की भी मृत्यु हो गई, लेकिन शिवरानी के वारिसों से मुकदमा चलता रहा।
साक्ष्य और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने दिसंबर 2025 में फैसला सुनाते हुए शिवरानी की कराई गई फर्जी रजिस्ट्री को रद्द कर दिया। ऐसे में अन्य कागजी कार्यवाही पूरी होने पर तीन माह बाद अब ब्रजेश को जमीन पर कब्जा मिल सका है। ब्रजेश के अनुसार यह सिर्फ जमीन की नहीं, बल्कि उनके पिता के सम्मान और न्याय की लड़ाई थी, जो आखिरकार उन्होंने जीत ली।