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महिला आयोग की नई अध्यक्ष बोलीं, लड़कियां बेवकूफ!

Mon, 22 Sep 2014 12:54 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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‘प्रॉब्लम ये है कि हमारी लड़कियां बड़ी भोली होती हैं। ...कोई लड़का जो थोड़ा स्मार्ट है, गोरा है, चश्मा पहनकर, काला चश्मा पहनकर आ जाता है मोटरबाइक पर। बेवकूफ लड़की को वो दिखता है तो वो पिघल जाती है।'
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'हमने कभी अपनी लड़कियों को ये नहीं बोला कि स्वयं मर्यादा पर टिके रहो। जब तक वो तुमसे शादी न करे, तुम उसके साथ ये सब मत रखो। जो माता-पिता होते हैं, वो लड़कियों से इस पर बात करने से झिझकते हैं।'

'तो ये लड़कियां बेचारी कहां...वो बेचारी बहक जाती हैं। ऐसे में पेरेंट्स को और समाज को गुस्सा आ जाता है। हमेशा मैं कहती हूं कि धब्बा तो हमारे समाज में लड़कियों पर लगता है। मैंने बहुत देखा है, स्मार्ट ब्यॉयज ऑल्वेज मैनेज टू गेट नियर द गर्ल्स।'
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ये बयान हैं राष्ट्रीय महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष ललिता कुमारमंगलम के जो उन्होंने रविवार को राजधानी में पत्रकारों के सामने रखे ‘लव जिहाद’ के मुद्दे पर रखे।

लव जिहाद को किया खारिज

दरअसल, ललिता मंगलम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय छात्रा बैठक एवं कार्यशाला में शामिल होने पहुंची थीं। लव जिहाद शब्द को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह नफरत पैदा करने वाला शब्द है। इसका उपयोग भी नहीं होना चाहिए।

अंतरजातीय विवाहों पर उन्होंने कहा कि यह परिवार पर निर्भर है कि वे इसे कैसे लेते हैं। मंगलम ने कहा कि इंटरकास्ट मैरिज तो फिर भी स्वीकार होने लगी हैं, लेकिन अंतर-धार्मिक विवाहों को समाज आज भी नहीं मानता है।

यह समाज में रह रहे परिवार को बहुत कष्ट देता है। उन्होंने कहा कि आयोग इन मामलों में क्या कर सकता है, यह चार्ज लेने के बाद ही बता सकेंगी। उन्होंने उत्तर भारत में महिलाओं पर अधिक अपराधों के लिए उन्होंने शिक्षा और गरीबी को जिम्मेदार ठहराया।
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नेताओं के घर में ऐसा हो तो...

ललिता मंगलम के अनुसार किसी भी दल के नेता जब किसी लड़की के मामले में असंवेदनशील बयान देते हैं, तो उन्हें समझना चाहिए कि अगर ऐसा उनके घर में हो तो वे क्या करेंगे? ऐसे बयान देने वाले नेता पुरुष हैं। इसलिए इनके बयानों को राजनीतिक संदर्भों में नहीं देखा जाना चाहिए।

यह भी बोलीं
-महिला सुरक्षा के लिए जरूरी है कि समाज में उनकी मर्यादा को स्थापित किया जाए। जब वे आर्थिक रूप से सक्षम और शिक्षित होंगी, सुरक्षित भी होंगी।
-लड़कियां व महिलाएं स्कूल, शौचालय, सार्वजनिक स्थानों पर जाने से डरने लगी हैं क्योंकि अनिष्ट की संभावना बनी रहती है।
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