लखनऊ। जनपद की आधा दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। वर्ष 2018-2019 और 2019-20 के दौरान कराए गए कार्यों का ब्योरा न देने और ऑडिट में पकड़ी गई वित्तीय अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) जितेंद्र गोंड ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संबंधित विकास खंडों के एडीओ पंचायत को आरोपी तत्कालीन ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए हैं।
हैरानी की बात यह है कि करीब सात साल बाद ऑडिट टीम की जांच में इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। जांच में पाया गया कि इन पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का आहरण तो कर लिया गया, लेकिन जब ऑडिट टीम ने दस्तावेजों और कार्यों का ब्योरा मांगा, तो प्रधान और सचिव संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
इन पंचायतों में हुई इतने की गड़बड़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, जिले के तीन प्रमुख विकास खंडों में सबसे अधिक गड़बड़ी मिली है।
विकासखंड गोसाईंगंज:
रतियामऊ पंचायत में 2019-20 के दौरान 22.94 लाख रुपये के कार्यों में हेराफेरी मिली।
विकासखंड माल:
ग्राम पंचायत रहटा में वर्ष 2019-20 में 20.40 लाख, नारायणपुर में वर्ष 2018-19 व 2019-20 में 43.72 लाख और सैदापुर में वर्ष 2019-20 में हुए निर्माण कार्यों में भारी गड़बड़ी पाई गई।
विकासखंड बीकेटी :
गोधना पंचायत में 2018-19 के दौरान 27.87 लाख और 2019-20 में 70 हजार रुपये, जबकि सरसवां पंचायत में वर्ष 2018-19 में करीब 15 लाख रुपये के कार्यों का ब्योरा गायब मिला।
प्रधानों और सचिवों में हड़कंप
डीपीआरओ के एफआईआर दर्ज कराने के आदेश के बाद संबंधित ब्लॉकों के तत्कालीन जिम्मेदारों में हड़कंप मचा हुआ है। डीपीआरओ जितेंद्र गोंड ने साफ किया है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एडीओ पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऑडिट रिपोर्ट को आधार बनाकर जल्द से जल्द संबंधित थानों में मुकदमा पंजीकृत कराएं।