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पुराने तेवर में दिखी सपा : अखिलेश यादव की गिरफ्तारी पर भड़के सपाई, पुलिस ने ईको गार्डन ले जाकर छोड़ा

Mon, 04 Oct 2021 08:27 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने उन्हें रिहा कर दिया लेकिन उन्हें लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति नहीं दी गई।
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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अरसे बाद समाजवादी पार्टी अपने पुराने तेवर में नजर आई। लखीमपुर खीरी में हुए बवाल के बाद घटना स्थल जाने की जिद पर अड़े सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को राजधानी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने गौतमपल्ली थाने के सामने खड़ी पुलिस की जीप को भी आग के हवाले कर दिया।

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अखिलेश यादव सोमवार सुबह लगभग 9 बजे विक्रमादित्य स्थित आवास से बाहर निकले। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बताया कि आगे जाने की इजाजत उन्हें नहीं है तो वे घर के सामने ही सड़क पर बैठ गए। इस दौरान सपा कार्यकर्ता भी भारी संख्या में जुटना शुरू हो गए और माहौल तनाव पूर्ण हो गया। पुलिस को कई बार हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। तब अखिलेश यादव को लखनऊ मध्य की पुलिस उपायुक्त ख्याति गर्ग ने धारा 144 के उल्लंघन का हवाला देकर उन्हें गिरफ्तार करने की बात कही। इसके बाद अखिलेश को एसएचओ हजरतगंज की गाड़ी में बिठा दिया गया। इस पर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी और गाड़ी को आगे जाने से रोकने लगे। हजरतगंज एसएचओ की जिस गाड़ी में अखिलेश यादव थे उसमें डीसीपी मध्य ख्याति गर्ग के अलावा सपा एमएलसी संजय लाठर, सुशील दीक्षित और लखनऊ बार के महामंत्री जीतू यादव भी थे।

तीन घंटे में तय हुआ साढ़े छह किलोमीटर का फासला
गिरफ्तारी के बाद अखिलेश यादव के साथ सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता पैदल ही ईको गार्डन पार्क की ओर चल दिए। रास्ते में कई जगहों पर सपा कार्यकर्ताओं ने गाड़ी के सामने लेट कर गाड़ी रोकने का प्रयास किया। अखिलेश यादव को दो बार गाड़ी से बाहर आकर अपने कार्यकर्ताओं को समझाना पड़ा। सपा का काफिला रोड शो के रूप में चल रहा था। यही वजह थी कि विक्रमादित्य मार्ग से इको गार्डन पार्क का फासला साढ़े 6 किलो मीटर है लेकिन उसे पूरा करने में तीन घंटे से भी अधिक समय लग गया। धरना स्थल पर अखिलेश यादव ने पत्रकारों से कहा कि भाजपा सरकार हिटलरशाही से भी बढ़कर काम कर रही है। किसानों को कुचलने के लिए उनपर गाड़ियां चढ़ा दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि गौतमपल्ली थाने के सामने खड़ी पुलिस की जीप में आग खुद पुलिस कर्मियों ने ही लगाई होगी। अखिलेश यादव धरना स्थल पहुंचे तो उन्हें संयुक्त पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया ने बताया कि आपको शांति भंग की आशंका में गिरफ्तार किया गया था, अब आप जा सकते हैं। इसके बाद लगभग तीन बजे अखिलेश यादव अपने घर की ओर चल दिए।

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किसानों की हत्या हुई, दोषियों को मिले सख्त सजा : अखिलेश

सपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि किसानों के साथ जुल्म हो रहा है। सरकार सच सामने नहीं आने देना चाहती। किसानों पर इतना अत्याचार और उत्पीड़न कभी नहीं हुआ। उन्होंने पूरे मामले में केन्द्रीय गृहराज्य मंत्री और उस कार्यक्त्रस्म में शामिल होने के लिए गए उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि किसानों की हत्या हुई है। दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिले। मांग की कि दोषियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हो। पीड़ित किसानों के परिजनों को दो- दो करोड़ रूपए मुआवजे में दिए जाए। घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष के नेताओं को किसानों के परिजनों से मिलने से रोकना हिटलरशाही है। आय दुगनी करने का वादा करने वाली यह सरकार असफल है। उन्होंने कहा कि किसानों के खिलाफ  भाजपा काला कानून क्यों लाई है?  सरकार के लोग किसानों को आतंकवादी और मवाली कहकर अपमानित कर रहे हैं। भाजपा शासन में कानून व्यवस्था ध्वस्त है। भाजपा तानाशाही कर रही है। जनता की आवाज दबाई जा रही है। सरकारी मशीनरी विपक्ष का दमन कर रही है। पुलिस प्रशासन सरकार का मोहरा बन गया है।
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