अमेठी निवासी 41 वर्षीय गजेंद्र प्रताप सिंह करीब दो माह पहले केजीएमयू के मेडिसिन विभाग में दिखाने आए थे। उनके पेट में पानी भर गया था। मेडिसिन विभाग ने उन्हें सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग रेफर कर दिया। यहां जांच में पता चला कि गजेंद्र को क्रोनिक लिवर डिजीज है। लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत बताई गई।
गैस्ट्रो सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. अभिजीत चंद्रा ने बताया कि मरीज की आर्थिक स्थित ठीक नहीं थी। वह खेती बाड़ी करता है। उसका 18 साल का बेटा है। कमाई का कोई और जरिया नहीं है। इस पर केजीएमयू प्रशासन ने उसका असाध्य योजना के तहत प्रत्यारोपण करने की रणनीति बनाई।
उसके बेटे और पत्नी की जांच की गई। प्रत्यारोपण के लिए पत्नी वंदना सिंह का लिवर फिट पाया गया। दोनों की सभी जांचें कराने के बाद मंगलवार सुबह सात बजे प्रत्यारोपण शुरू हुआ, जो रात आठ बजे तक चला। प्रत्यारोपण के बाद दोनों की हालत स्थिर है।
केजीएमयू में प्रत्यारोपण करने वाली टीम में प्रो. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. प्रदीप जोशी, गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित रुंगटा, डॉ. अनीता मलिक, डॉ. एहसान सिद्दीकी, डॉ. रवि प्रकाश, डॉ. मनोज चौरसिया, डॉ. मनोज, डॉ. डी. हिमाशुं, डॉ. तूलिका चंद्रा, डॉ. अमिता जैन, डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. शीतल वर्मा, डॉ. दर्शन बजाज, डॉ. गौरव चौधरी, डॉ. वाहिद, डॉ. अजय कुमार, डॉ. ओपी सिंह एवं कोआर्डिनेटर पीयूष श्रीवास्तव, क्षितिज वर्मा, अश्विनी कुमार सिंह शामिल रहे।
इस दौरान सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार एवं एमएस प्रो. बीके ओझा भी थे। इसके अलावा मैक्स दिल्ली के डॉ. राजेश डे, डॉ. शालीन अग्रवाल, डॉ. वैभव नासा ने सहयोग किया। कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने पूरी टीम को बधाई दी।
केजीएमयू में पहला लिवर प्रत्यारोपण 14 मार्च को हुआ था। रायबरेली निवासी को उसकी पत्नी ने लिवर दान किया था। इसके बाद से शुरू हुआ प्रत्यारोपण का सिलसिला लगातार चल रहा है। लिवर प्रत्यारोपण कराने वाले सभी मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हैं और फॉलोअप में आ रहे हैं।