बहराइच के जंगल से सटे गांवों की महिलाएं अशिक्षा के बावजूद देश के लिए रोल मॉडल बनेंगी। अशिक्षित होते हुए भी महिलाओं ने सोलर लैंप बनाने का हुनर सीखा है। अब महिलाएं प्रतिदिन सोलर लैंप तैयार कर रही हैं। उसके निर्माण और बिक्री से महिलाएं 350 से 500 रुपये प्रतिदिन कमा रही हैं।
इन महिलाओं पर भारत सरकार की पहल के बाद आईआईटी मुंबई के तकनीकी विशेषज्ञों ने डाक्यूमेंट्री फिल्म तैयार की है। यह फिल्म पूरे देश में प्रदर्शित कर महिलाओं को स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा। मिहींपुरवा विकासखंड में अशिक्षा और बेरोजगारी 80 फीसदी है।
इलाका जंगल से सटा होने से यहां पर विकास की किरणें नहीं पहुंच सकी हैं। अभाव के बीच राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण परिवार के लिए उजाला बनकर सामने आया है। मिशन की ओर से सोलर लैंप निर्माण के प्रशिक्षण की कवायद पांच माह पूर्व शुरू हुई थी। इसके तहत सोलर लैंप बनाने के उपकरण आईआईटी मुंबई की ओर से भेजे गए।