प्रदेश का अल्पसंख्यक कल्याण महकमा उधार व जुगाड़ के अधिकारियों से चल रहा है। यहां अनुभाग से लेकर सचिव स्तर तक के ज्यादातर अफसरों का यही हाल है। जिन अधिकारियों को चार्ज दिया गया है, उनके पास पहले से ही कई विभाग हैं। यही वजह है कि प्रदेश सरकार की शीर्ष प्राथमिकता वाले अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की महत्वपूर्ण योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं। मुख्यमंत्री तक की घोषणाओं की दशा यही है।
स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जहां एक ओर मंत्रियों के यहां निजी सचिव व अपर निजी सचिव की तैनाती के लिए मारामारी रहती है, वहीं अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री आजम खां के यहां कोई जाना नहीं चाहता। यहां उधार के अधिकारियों से काम चलाया जा रहा है।
मंत्री के यहां कार्यवाहक निजी सचिव के रूप में तनवीर तैनात हैं। वे हज अधिकारी भी हैं। जल निगम के अवकाशप्राप्त इंजीनियर सैयद आफाक अहमद ओएसडी के रूप में तैनात हैं। दरअसल, मंत्री के मूड को देखते हुए उनके पास कोई आना नहीं चाहता।
करीब एक साल पहले यहां सात अधिकारी निजी व अपर निजी सचिव के पद पर तैनात थे, लेकिन इन सभी ने मंत्री पर असंसदीय शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए सामूहिक कार्य बहिष्कार कर दिया था। तब से आजम के विभाग में कोई निजी सचिव व अपर निजी सचिव नहीं आया।
इस तरह हो रहा है खिलवाड़
वहीं, विभाग के सचिव श्रीप्रकाश सिंह के पास पहले से नगर विकास विभाग है। वे राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) के भी निदेशक हैं। रिटायर होने के बाद उन्हें सरकार ने सेवा विस्तार दिया है।
विशेष सचिव मोहम्मद जुबैर अली हाशमी पहले से ही नगर विकास विभाग में विशेष सचिव हैं। उन्हें हाल ही अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग का भी विशेष सचिव बना दिया गया है।
यही नहीं, निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है। फैजुर्रहमान को निदेशक बनाया गया है। यूं तो यह पद पीसीएस का होता है लेकिन फैजुर्रहमान एजुकेशन सर्विसेज के अधिकारी हैं।
सुन्नी वक्फ बोर्ड के सीईओ वे पहले से हैं। अब सरकार ने उन्हें उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी का सचिव भी बना दिया है। ऐसे में निदेशालय में भी जरूरी फाइलें समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं।
अनुभाग में खाली हैं कई पद
अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग में अनुसचिव से लेकर सचिव स्तर के आठ अधिकारी हैं, जबकि अनुभागों में काम करने वाले मात्र नौ ही समीक्षा अधिकारी हैं। अनुभाग अधिकारी के 16 पद हैं। इनमें से सात खाली पड़े हैं।
चार अनुभाग अधिकारियों के पद में एक पद खाली पड़ा है। यहां अनुभाग संख्या चार में अनुभाग अधिकारी तक नहीं है। सहायक समीक्षा अधिकारी के भी 10 पदों में मात्र तीन ही कार्यरत हैं। सात पद सहायक अनुभाग अधिकारी के भी खाली हैं। जबकि विभाग में एक सचिव, दो विशेष सचिव, एक संयुक्त सचिव, तीन उप सचिव व एक अनुसचिव हैं।
ये काम पड़े हैं अधूरे
-प्रदेश के 146 मदरसों को अनुदान देना
-मदरसा नियमावली का अभी तक न बनना
-वेतन वितरण अधिनियम लागू न होना
-मदरसा शिक्षकों के मानदेय में बढ़ोतरी