पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं में परिवार के मुखिया का भाव जगाकर उन्हें सशक्त बनाने के लिए शासन स्तर पर कई ठोस पहल की गई हैं। अफसरों का मानना है कि इसके अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं। गांव-समाज की महिलाओं की सरकारी योजनाओं के प्रति भागीदारी बढ़ी है।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण की बात पुरानी है। महिला नेताओं, वीरांगनाओं के नाम पुरस्कार और पेंशन का चलन भी पुराना है। इससे महिलाओं में लीडरशिप का भाव तो बढ़ा, मगर तमाम परिवारों में अब भी महिलाओं की हैसियत पहले जैसी ही है।
उनके प्रधान, बीडीसी या प्रमुख होने के बावजूद असली निर्णय पुरुष ही करते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने मनरेगा जैसी योजनाओं में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम देने में प्राथमिकता देने की पहल की।वह लगातार इस पर फोकस बनाए हुए है। वहीं, राज्य सरकार ने भी कई दूसरी सरकारी सहायता वाली योजनाओं का लाभ परिवार की महिलाओं के नाम से देने की पहल की है।