बड़बोलापन और पार्टी निर्देशों की अवहेलना करना सपा के राष्ट्रीय महासचिव राम आसरे कुशवाहा को भारी पड़ गया है। पार्टी ने उन्हें महासचिव पद से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया।
कुशवाहा से बुधवार को मंत्री पद भी छीन लिया गया। वह यूपी में सुदूर संवेदन उपयोग केंद्र (रिमोट सेंसिंग सेंटर) के अध्यक्ष थे और उन्हें राज्य मंत्री का भी दर्जा प्राप्त था।
कुशवाहा ने इस पूरे मामले पर पहली प्रतिक्रिया देते हुए पूछा, 'मैंने ऐसा क्या गुनाह किया है कि इतनी बड़ी सजा दी गई है मुझे।'
उन्होंने कहा, 'मैंने पार्टी को बढ़ाने के लिए रात-दिन एक किया है। मैं इस बारे में नेता जी (मुलायम सिंह यादव) से मिलकर वजह पूछूंगा।'
कुशवाहा ने यह भी कहा कि वो पार्टी के फैसले का सम्मान करते हैं और पार्टी से नाता नहीं तोड़ेंगे। उन्होंने कहा, 'मैं कल भी सपा में था, आज भी सपा में हूं और कल भी सपा में ही रहूंगा।'
कुशवाहा अक्सर टीवी चैनलों पर विभिन्न मुद्दों राय जाहिर करते दिख जाते हैं। सपा नेतृत्व इसे ठीक नहीं मानता। सपा में केवल दो लोग पार्टी लाइन पर बोलने के लिए अधिकृत हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर रामगोपाल यादव और प्रदेश में राजेन्द्र चौधरी। इन दोनों प्रवक्ताओं के अलावा किसी के भी मीडिया में पार्टी से जुड़े मामलों या अन्य विषयों पर बोलने की मनाही है।
कुशवाहा लगातार इसकी अनदेखी कर रहे थे। उन्हें बयानबाजी करने से मना भी किया गया था लेकिन वह मौका लगते ही मीडिया खासतौर से चैनलों पर नजर आ जाते थे।
पार्टी निर्देशों की लगातार अनदेखी करने पर मंगलवार को सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने महासचिव पद से उनकी बर्खास्तगी का पत्र मीडिया को जारी किया। इसमें पद से बर्खास्त करने का कारण नहीं बताया गया है।
पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि पिछले दिनों नोएडा में उनकी सक्रियता को लेकर भी पार्टी के एक प्रभावशाली महासचिव नाराज थे। मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर चूक संबंधी बयान पर भी पार्टी उनसे नाखुश थी।
हालांकि पार्टी ने इसकी पुष्टि नहीं की है। पद से उनकी बर्खास्तगी का फैसला मंगलवार को मुलायम सिंह यादव के दिल्ली पहुंचते ही ले लिया गया।